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कहती वसुधा 

दीप्ति खरे
मंडला (मध्यप्रदेश)
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मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)…

करती है वसुधा पुकार,
मत करो मेरा आवरण तार तार।

ताल तलैया सागर नदिया,
यह हैं मेरे सुंदर गहने
मत करो नष्ट इनको तुम सब,
विनती है मेरी बारम्बार।
करती है वसुधा पुकार,
मत करो मेरा आवरण तार-तार…॥

झाड़-पेड़, पर्वत और टीले,
यह सब हैं मेरी संतान
नष्ट करो ना स्वार्थ की खातिर,
करो ना मुझ पर अत्याचार।
करती है वसुधा पुकार,
मत करो मेरा आवरण तार-तार…॥

हर एक खेत है मेरी चुनरिया,
निर्माण की धुन में जिनको रौंदा
हवा को भी कर दिया प्रदूषित,
जिसके बिना नहीं संसार।
करती है वसुधा पुकार,
मत करो मेरा आवरण तार-तार…॥

विनती या चेतावनी समझो,
पर खुद को मर्यादित कर लो
मत करो प्रकृति से छेड़छाड़,
वरना भोगने होंगे दुष्परिणाम।
करती है वसुधा पुकार,
मत करो मेरा आवरण तार-तार…॥

मेरा आवरण पर्यावरण है,
रक्षा हेतु रहो तैयार।
भावी पीढ़ी को तब दे पाओगे,
तुम एक सुरक्षित संसार।
करती है वसुधा पुकार,
मत करो मेरा आवरण तार-तार…॥