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नन्हीं परी मेरी धड़कन

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड) 
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नन्हीं परी जब आई मेरे संसार में, 
डूब गया था मैं खुशी के बाज़ार में
पूरा हो गया उस दिन मेरा परिवार, 
खुशी से महक उठा था मेरा घर-द्वार। 

उसकी पहली बोली से भाग्य जागा, 
टूट गया मेरे जीवन से दु:ख का धागा
उसकी हँसी से होने लगा उजियारा, 
आँसू से छा जाता घना अंधियारा। 

पहला कदम चलकर गिरना, गिरकर चलना,
चलते-चलते रुकना, फिर सीखा दौड़ना
पहली लट, पहला काजल, पहली चोटी,
पहली बार गई स्कूल लेकर बस्ता छोटी।

किताबों से दोस्ती, सपनों से यारी,
अब बन गई बेटी मेरी राजदुलारी
उसके कष्टों से मैं हो जाता बेहाल,
अब रखने लगी बेटी ही मेरा ख्याल।

कब समय का पहिया घूमा, पता न चला,
कब बेटी मेरी बड़ी हो गई, पता न चला
आने लगे थे उसके लिए अनेक रिश्ते,
कब एक राजकुमार भाया, पता न चला।

अब बेटी मेरी अपने सपनों में खोने लगी,
देख हुआ मैं खुश, पर दिल मेरा रोने लगा
सोच-सोच हो रहा है मेरा बुरा हाल,
विदाई का जब भी आता है ख्याल।

दिल ही नहीं, धड़कन हो तुम मेरी,
मधुर सपनों का कण-कण हो मेरी।
सोचता हूँ कैसे करूँ तुझे अपने से दूर,
कैसा है यह नियम, कैसा है यह दस्तूर…॥

परिचय-साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव-लोहापिटटी में है। जन्म तारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद है। भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन (डिप्लोमा) की  शिक्षा प्राप्त की है। साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल है। आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी (विद्यालय में  शिक्षक) है। सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैं। लेखन विधा-कविता एवं लेख है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैं। विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं  कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।