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नसीहत

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ स्पर्धा विशेष…………………


सरला,महज २० साल की है..पारिवारिक जिम्मेदारियों ने कागज-कलम के स्थान पर झाड़ू पकड़ा दी। चार-पाँच जगह काम करके गुजर-बसर होता है परिवार का।
आज सुबह जब अंकल जी अपनी बेटी मेघा को समझा रहे थे,तो बरबस सरला के कान खड़े हो गए। मेघा यही कोई २०-२१ साल की युवा लड़की है जो महाविद्यालय जाती है,घर-बाहर का सारा काम बड़ी निपुणता से करती है। अंकल जी,उसके लिए लड़का तलाश रहे हैं। आज न जाने क्या हुआ अंकल जी को ? अपनी बेटी को नसीहत देने लगे…-“अब तुम साल २ साल हो हमारे साथ। इसलिए मेरी हार्दिक इच्छा है कि तुम बिदा होने से पहले अपने पैरों पर खड़ी हो जाओ। शिक्षा और दक्षता इतनी हासिल करो कि कल से तुम्हें किसी के सामने हाथ ना फैलाना न पड़े। अपने निर्णय लेने में सक्षम बन जाओ,तो मुझे चैन पड़े!” स्वावलंबन की यह बात सुनकर सरला और मेघा दोनों की आँखें भर आईं।

परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl