दीप्ति खरे
मंडला (मध्यप्रदेश)
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रिश्तों का रक्षा-बंधन (रक्षाबंधन विशेष)….
चलो इस बार रक्षा बंधन को
हर रिश्ते का पर्व बनाते हैं
भाई की कलाई पर राखी के साथ,
हर रिश्ते को प्रेम से सजाते हैं।
अपनेपन की रोली से,
सौहार्द्र का तिलक लगाते हैं
प्रेम के सुंदर धागे से,
रिश्तों को बांधते जाते हैं।
भाई की कलाई पर राखी के साथ
हर रिश्ते को प्रेम से सजाते हैं…॥
माँ की ममता का आँचल में,
डाल सकें थोड़ी खुशियाँ
पिता की जिम्मेदारी में हाथ बांटकर,
उनका संबल बन जाते हैं।
भाई की कलाई पर राखी के साथ,
हर रिश्ते को प्रेम से सजाते हैं…॥
बचपन की मीठी यादों से
मन में भी घुल जाए मिठास
भाई बहन के रिश्तों को फिर,
बचपन-सा निश्छल बनाते हैं।
भाई की कलाई पर राखी के साथ,
हर रिश्ते को प्रेम से सजाते हैं…॥
गुम हो गए जो रिश्ते,
समय के अंधियारे में
स्नेह का दीपक जलाकर,
उनको वापस बुलाते हैं।
भाई की कलाई पर राखी के साथ,
हर रिश्ते को प्रेम से सजाते हैं…॥
क्यों केवल अपने रिश्तों तक,
सीमित रहे अपनों का प्यार
चलो मानवता से भी हम,
नेह के स्नेहिल तार बांधते हैं।
भाई की कलाई पर राखी के साथ,
हर रिश्ते को प्रेम से सजाते हैं…॥