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रक्षाबंधन

पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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रिश्तों का रक्षा-बंधन   (रक्षाबंधन विशेष)…

आया है राखी का पावन पर्व,
भाई-बहन के स्नेह वंदन का दिन
मन में हर पल  इंतजार है बहना का,
प्यारी-प्यारी राखी लेकर बहन आ गई तो
बीता बचपन सामने आकर खड़ा हो गया,
भाई की वही स्नेहिल कलाई, वही गर्वित मस्तक।

राखी का धागा तो छोटा है, लेकिन मेरा स्नेह अनंत है
मेरा भाई है, मेरे जीवन की अमूल्य सौगात
कभी खिलौने को लेकर आपस में झगड़े थे,
कभी मिठाई आधी आधी लेकर भी खुश होते थे
कभी शिकायत माँ से किया करते थे
लेकिन पल-छिन में सब मिट जाती थी दिल की गाँठें।

समय तो अनवरत बहता रहता,
बीत गए वह बचपन के दिन
लेकिन मन के कोने में आज भी गूँजतीं हैं वह यादें,
ईश्वर करे कि यह आपस का प्रेम ना बदले
ना ही बदले ये रिश्तों की मिठास,
हर सावन फिर से राखी आए
हर बहना पाए भाई का स्नेह और मान,
ईश्वर से बस इतनी-सी प्रार्थना
यह स्नेह सदा यूँ ही बना रहे,
भाई की कलाई पर बहन का स्नेह।

बहन को न चाँदी की चाहत, न ही सोने की आस,
न कोई वादा बड़ा, न ही शब्दों का भार
बस है आँखों में स्नेह और हृदय में प्यार,
राखी कहती हर वर्ष केवल एक ही बात
रिश्ते धन से नहीं, प्रेम से होते खास,
दूरियों के पार से भी सुनाई देती है
बहन के दिल से सदा निकलती हुई आवाज,
भैया मेरे तुम सदा खुश रहना॥