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‘पालक’ हमारा पालनहार भी

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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शाकाहारी भोजन के अंदर आपको प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम समेत कई सारे पोषक तत्व मिलेंगे लेकिन कई लोग मानते हैं कि शाकाहारी भोजन में मांसाहार से कम पोषण होता है, पर यह भ्रम है।
पालक सबसे पोषक शाकाहारी सब्जी है, जिसमें अनगिनत पोषक तत्व छिपे होते हैं। ये घटक सेहत का खजाना हैं, जो नस-नस में कमाल की ताकत भर देंगे। आहार में पालक शामिल करके तेजी से वजन कम कर सकते हैं और हड्डियों को मजबूत बना सकते हैं। मधुमेह रोगियों के लिए भी पालक शानदार शाकाहारी भोजन है।
सर्दियों में पालक-पनीर और पालक का साग काफी स्वादिष्ट लगता है, लेकिन सर्दियों में पालक का फायदा यह भी है कि पानी की कमी पूरी होती है। चूंकि, सर्दियों में कम पानी पिया जाता है, जिससे सूखी त्वचा, डैंड्रफ, थकान जैसी समस्या हो सकती है। पालक का ९१ प्रतिशत हिस्सा पानी ही होता है, जिसके कारण इसे खाने से पानी की कमी नहीं होती है।
लोगों को लगता है कि शाकाहारी चीजों में प्रोटीन नहीं होता है, लेकिन यह गलत अवधारणा है, क्योंकि करीब १०० ग्राम पालक के पत्ते खाने से ही २.९ ग्राम प्रोटीन मिल जाता है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसलिए प्रोटीन से भरपूर पालक जरूर खाएं।
अगर आप वसा जलाकर पतले होना चाहते हैं, तो पालक खाना शुरू करें। इसमें भरपूर मात्रा में अघुलनशील फाइबर होता है, जो पाचन और मेटाबॉलिज्म को सुधारता है। इससे वसा तेजी से कम होती है और चर्बी घटने लगती है।
बच्चों के लिए पालक का सेवन काफी जरूरी है क्योंकि, यह उनकी हड्डियों के विकास और मजबूती में मदद करता है। १०० ग्राम पालक के पत्तों के अंदर करीब ९९ एमजी कैल्शियम होता है, जो तंत्रिका तंत्र, हृदय और पेशियों लिए भी महत्वपूर्ण होता है।
ऐसे ही खून की कमी दूर करने वाला शाकाहारी खाद्य पदार्थ देख रहे हैं, तो भी पालक एकदम उचित बैठता है, क्योंकि १०० ग्राम पालक के अंदर २.९ एमजी आयरन होता है, जो हीमोग्लोबिन के उत्पादन में मदद करता है और ऊतकों तक प्राणवायु लेकर जाता है।
विटामिन्स के हिसाब से भी पालक काफी पौष्टिक है। १०० ग्राम पालक में करीब २८.१ एमजी विटामिन ‘सी’ होता है। यह त्वचा को जवान बनाए रखता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर बीमारियों से दूर रखता है।
यह तय है कि, पालक में अनगिनत पोषक तत्व होते हैं। यह शाकाहारी साग विटामिन के १, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, ल्युटीन, पोटेशियम, नाइट्रेट्स आदि कई स्वास्थ्यवर्धक चीजें प्रदान करती है। इसलिए यह एक अच्छी पालनहार सब्जी है।

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।