सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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पीली हल्दी सोहती,
मेंहदी लगे हाथ
बेटी लाल जोड़े में,
छूट रहा है साथ।
घर में बेटी खेलती,
घर करती आबाद
टुकड़ा मेरे जिगर का,
लेकर चले दमाद।
घर-आँगन सूना हुआ,
सूना सब संसार
आगे-पीछे घूमती,
बेटी मेरा प्यार।
कठिन समय है ब्याह का,
माँ-पापा का प्यार।
एक रात में बदलता,
बेटी पर अधिकार॥