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प्रेम की धारा

भानु शर्मा ‘रंज’
धौलपुर(राजस्थान)

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समंदर-सा हृदय समझकर जो तेरा,
प्रेम की धारा बहा दी बडे़ चाव से
छीन रहा है महक देखिये तो मधुप,
खिलते हुए कोई प्रीत के गुलाब से।
विश्वास का एक घर बनाया हमने,
प्रेम की प्रतिमा को स्थापित करूँ
शाप से जो अधूरा रह गया प्रेम,
बहा के गंगा उसे अनुशापित करूँ।
भागीरथी बन वसुधा पर प्राणप्रिये,
पावन गंगा को भी लाऊँ तेरे लिये
किंतु रंज यही अब हृदय को हुआ,
ख्वाब भी छीन लिया अब ख्वाब से।
समंदर सा हृदय समझकर जो तेरा,
प्रेम की धारा बहा दी बडे़ चाव से॥

प्रतिच्छवि न्यारी है रश्मि रूप की,
नवल अनुराग से प्रीत को निहारूँ
यादों का मधुप प्रीत के सोमरस को,
चुराये नैन से तब मीत तुझे पुकारूँ।
दर्पण-सी प्रतिपल तेरी अनुपम छवि,
प्रतिबिंब बन दिखती है कण-कण में
जीवन पथ पर मुझे यही अहसास है,
सिंधु का प्रेम पाती नदी समर्पण में।
किंतु आशाओं की इन बहारों में भी,
बच न पाया मैं पहुँच किनारों में भी।
सागर के बिन ही डूबी थी मेरी नौका,
प्रलय हो गयी बस एक बूंद आब से।
समंदर-सा हृदय समझकर जो तेरा,
प्रेम की धारा बहा दी बडे़ चाव से॥

अलंकृत छवि प्रेम की बनो तो सही,
भाव पुष्प से देवी मैं आरती गाऊँगा
नैन के निर्मल जल से चरण को धो के,
आओ तो सही पुष्प पथ पे बिछाऊँगा।
हृदय की सेज पर विश्राम करना तुम,
धड़कनों का मधुर संगीत सुनना प्रिये
स्वप्न में उपवन में विचरण करो जब,
तब हमारे लिये प्रीत पुष्प चुनना प्रिये।
थाम के हाथ तुम्हारा राह कट जायेगी,
जिंदगी की घड़ी तेरे साथ बंट जायेगी
किंतु सिमट गयी निराशाओं में जिंदगी,
एक किरण भी न मिली आफताब से।
समंदर-सा हृदय समझकर जो तेरा,
प्रेम की धारा बहा दी बडे़ चाव से॥

परिचय-भानु शर्मा का साहित्यिक उपनाम-रंज है। जन्म तारीख २ अक्टूबर १९९५ और जन्म स्थान-बदरिका है। वर्तमान में बदरिका,धौलपुर (राजस्थान) में ही स्थाई बसेरा है। हिंदी भाषा जानने वाले रंज की शिक्षा-जी.एन.एम. और बी.ए. (हिंदी साहित्य) है। कार्यक्षेत्र-नर्सिंग होम में नौकरी है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में भागीदारी करते हैं। सभी विधा में लेखन करते हैं। ‘काव्यांजलि'(सांझा संग्रह)सहित अन्य पत्र-पत्रिकाओं में भी करीब सौ रचना प्रकाशित हैं। इनको प्राप्त सम्मान-पुरस्कार में-छंद रत्न,युवा साहित्य सम्मान और काव्य भूषण सम्मान प्रमुख हैं। ब्लॉग पर लेखन करने वाले भानु शर्मा की विशेष उपलब्धि-काव्य सम्मान और मंच पर कविता प्रस्तुति है। लेखनी का उद्देश्य-समाज को आईना दिखाना एवं कुरीतियों को खत्म करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद एवं प्रेरणा पुंज-रामधारी सिंह दिनकर है। विशेषज्ञता-कविता पाठन है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-हिंदी हमारी माँ है उर्दू हमारी मौसी,दोनों की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है।