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फिर गूँजा ‘जय-हिन्द’ का नारा

गोपाल मोहन मिश्र
दरभंगा (बिहार)
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गणतंत्र दिवस : देश और युवा सोच…

बलिदानों की तप्त धरा पर, शोभित है गणतंत्र हमारा।
संघर्षों के उच्च शिखर पर, फिर गूँजा ‘जय-हिन्द’ का नारा॥

भारत माँ के चरणों पर अर्पित है सर्वस्व हमारा,
राष्ट्र-ध्वजा के तीन रंग में, आदर्शों की पावन धारा।
युवा सोच हो,सुदृढ़ इरादे, संकल्पों का वैभव सारा,
संघर्षों के उच्च शिखर पर, फिर गूँजा ‘जय-हिन्द’का नारा…॥

अंधियारे को भेद खिलेगा, उम्मीदों का स्वप्निल सूरज,
नवल प्रगति की दिशा गढ़ेगा, जगमग होगा देश हमारा।
लोकतंत्र की धरती ने फिर, नई सुबह को आज पुकारा,
संघर्षों के उच्च शिखर पर, फिर गूँजा ‘जय-हिन्द’का नारा…॥

नव हरीतिमा से पुष्पित हो, जीवन का उल्लास सहारा,
सदा सादगी, सच्चाई में, करुणा में विश्वास हमारा।
आगे बढ़ते प्रगति-चक्र से, गतिमय हो परिवेश हमारा,
संघर्षों के उच्च शिखर पर, फिर गूँजा ‘जय-हिन्द’का नारा…॥

परिचय–गोपाल मोहन मिश्र की जन्म तारीख २८ जुलाई १९५५ व जन्म स्थान मुजफ्फरपुर (बिहार)है। वर्तमान में आप लहेरिया सराय (दरभंगा,बिहार)में निवासरत हैं,जबकि स्थाई पता-ग्राम सोती सलेमपुर(जिला समस्तीपुर-बिहार)है। हिंदी,मैथिली तथा अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले बिहारवासी श्री मिश्र की पूर्ण शिक्षा स्नातकोत्तर है। कार्यक्षेत्र में सेवानिवृत्त(बैंक प्रबंधक)हैं। आपकी लेखन विधा-कहानी, लघुकथा,लेख एवं कविता है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। ब्लॉग पर भी भावनाएँ व्यक्त करने वाले श्री मिश्र की लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा है। इनके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक- फणीश्वरनाथ ‘रेणु’,रामधारी सिंह ‘दिनकर’, गोपाल दास ‘नीरज’, हरिवंश राय बच्चन एवं प्रेरणापुंज-फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शानदार नेतृत्व में बहुमुखी विकास और दुनियाभर में पहचान बना रहा है I हिंदी,हिंदू,हिंदुस्तान की प्रबल धारा बह रही हैI”

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