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बूँद-सा बन जा

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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टप-टप टपके राह बनाती
बूँद न हारी चलती जाती,
धीरे-धीरे वह बलखाती
कठिन डगर पर वह मुस्काती।

बूँद-बूँद से घट भर जाता
बूँद*बूँद भर सिंधु कहाता,
लघु को तुम सब लघु मत जानो
लघुता ही बढ़ बड़ा हो जाता।

नर तू भी बूँद-सा बन जा,
नित प्रति कर्म-धर्म तू कर जा।
एक दिवस जग जय-जय गाए,
तेरा यश नभ तक फैलाए॥