ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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प्रेम करना है तो खुद से करो, दूसरों में क्या रखा है,
जमाने ने तो हमें सिखा ही दिया गैर तो गैर सदा है।
गर खुद से करोगे प्रेम तो खुद का जरुर भला होगा,
दूसरों से करोगे प्रेम तो कभी न कभी दगा होगा।
वो जमाना चला गया, जब प्रेम के बदले प्रेम मिलता था,
आज खुद के लिए सोचो तो इक नया सफ़र मिलेगा।
भरोसा करना है तो खुद पर करो आत्मविश्वास बढ़ेगा,
दूसरों पर करोगे तो सभी जमा पूंजी निकल जाएगी।
सुनो तुम हर किसी की तो नया-नया विचार मिलेगा,
करो तुम अपने दिल की और भी आत्म संबल मिलेगा।
जमाने में झूठ, मक्कारी, तिरस्कार, स्वार्थ अब बढ़ गया है,
अब चाहकर भी अपने-पराए का तुम्हें पता नहीं चलेगा।
आज मजबूरी का फायदा हर कोई भी उठा सकता है,
जब तुम्हें जरूरत हो तब वक़्त पर कोई साथ नहीं देगा।
तुम दूसरों की समय पर मदद कर भी दो मगर साहब,
तुम्हारी बारी आएगी तो वो पतली गली से निकल लेगा॥