गोपाल मोहन मिश्र
दरभंगा (बिहार)
*****************************************
इतनी बड़ी पृथ्वी पर,
मुश्किल है
एक बच्चे का आज़ादी से खेलना,
इतनी पाबंदियाँ हैं कि
लोग हौसला नहीं, हिदायतें दिया करते हैं,
रुक जाते हैं उनके पाँव।
जो आसमान नापने के लिए बने,
चुप हो गई उनकी आवाज़
जिसमें नई भाषा का जन्म होना था,
रंगों की थकान
उन्हें बुला रही है,
ख़ाली दीवारें इंतज़ार में हैं कि
उनकी रंगत बदल जाए।
खिलौने बुझे हैं,
तस्वीरें उदास
बच्चे कुछ भी करें तो,
वह क़ुबूल नहीं होगा
ज़िद पर गिरेगा हज़ार मन पानी।
एक दिन ख़त्म हो जाएगी,
कुछ करने की यह बेचैनी
कहने वाले,
उनकी शांति की मिसालें देंगे
जबकि वे नहीं जानते।
इस शांति में,
कितनी कलाओं के शव दफ़्न हो गए॥
परिचय–गोपाल मोहन मिश्र की जन्म तारीख २८ जुलाई १९५५ व जन्म स्थान मुजफ्फरपुर (बिहार)है। वर्तमान में आप लहेरिया सराय (दरभंगा,बिहार)में निवासरत हैं,जबकि स्थाई पता-ग्राम सोती सलेमपुर(जिला समस्तीपुर-बिहार)है। हिंदी,मैथिली तथा अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले बिहारवासी श्री मिश्र की पूर्ण शिक्षा स्नातकोत्तर है। कार्यक्षेत्र में सेवानिवृत्त(बैंक प्रबंधक)हैं। आपकी लेखन विधा-कहानी, लघुकथा,लेख एवं कविता है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। ब्लॉग पर भी भावनाएँ व्यक्त करने वाले श्री मिश्र की लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा है। इनके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक- फणीश्वरनाथ ‘रेणु’,रामधारी सिंह ‘दिनकर’, गोपाल दास ‘नीरज’, हरिवंश राय बच्चन एवं प्रेरणापुंज-फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शानदार नेतृत्व में बहुमुखी विकास और दुनियाभर में पहचान बना रहा है I हिंदी,हिंदू,हिंदुस्तान की प्रबल धारा बह रही हैI”