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भाई-बहन का प्यार अनोखा

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड) 
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रिश्तों का रक्षा-बंधन  (रक्षाबंधन विशेष)…

भाई-बहन का रिश्ता है अनोखा,
दुनिया का सबसे सुंदर झरोखा
लेन-देन का नहीं है कोई हिसाब,
इनमें ही बसता है प्यार बेहिसाब।

इनके बीच होती कभी नोक-झोंक,
तो कभी होती मीठी तकरार
मत समझो इसको तुम बेकार,
सचमुच इसमें बसता सच्चा प्यार।

भाई की कलाई और बहन की राखी,
जैसे सफ़र में चले अमृत की झांकी
यह केवल धागा नहीं, है वचन प्यारा,
भाई ही होता बहन का मज़बूत सहारा।

जब बहन होती अपने ससुराल में,
भाई भी अपने काम और ख्याल में
फिर भी यादों का दीया जलता है,
सदैव मन में प्यार ही प्यार पलता है।

कहता ‘राजू’ भाई-बहन है अनमोल,
इस रिश्ते से बड़ा नहीं है कोई मोल।
यह रिश्ता रहे सलामत उम्रभर,
भाई-बहन का प्यार रहे हर घर॥

परिचय-साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव-लोहापिटटी में है। जन्म तारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद है। भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन (डिप्लोमा) की  शिक्षा प्राप्त की है। साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल है। आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी (विद्यालय में  शिक्षक) है। सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैं। लेखन विधा-कविता एवं लेख है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैं। विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं  कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।