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भाई मेरी परछाई

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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‘विश्व भाई दिवस’ विशेष…

२४ मई का पावन दिवस,
खुशियाँ लाया अनंत असीम
यह ‘विश्व बन्धु दिवस’ रखता है,
प्रेम भाव फैलाने की चाहत असीम।

‘भाई’ वह, जो कंधे से कंधा,
मिलाकर चले पिता का
राखी की भी लाज रखे,
अपनी दुलारी बहनों की।

माता को सुख पहुँचाते,
करे देश की रक्षा
सीमा पर सजग प्रहरी,
बन कर करें देश की सुरक्षा।

लिखा जा चुका स्वर्ण अक्षरों में,
भाई तुम्हारा इतिहास
अम्बर पर बादल छा जाएगा,
यही हमारा विश्वास।

भाई एक लहर है,
भाई एक किनारा
भाई अनमोल है,
आकाश का सितारा।

सच बिकता है, झूठ बिकता,
बिकती है हर कहानी
नहीं बिकता है भाई का शौर्य- जवानी,
भाई अपना त्याग कर सब खुशियाँ लाता।

भाई, बदले में कुछ नहीं लेता,
बहनों को मुस्कान ही देता
भाई अमर है, प्रेम का सागर है,
भाई मेरी जान है, शान है।

मेरी पहचान है, मेरा गुरूर है,
मेरा भाई दोस्त है, मेरा प्यार है
मेरी परछाई बन कर रहता है,
सुनता है सुख-दुःख सारे।

वो मेरा सुकून है, लड़ता है मनाता है,
उसका घर हमेशा खुशहाल रहे।
यही दुआ, मेरी उम्र उसे लग जाए, यह मेरा कृष्ण कुमार है॥