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भीतरी दुश्मन

तारा प्रजापत ‘प्रीत’
रातानाड़ा(राजस्थान) 
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देश की सुरक्षा को,
केवल बाहरी
आतंक से ही नहीं,
भीतर छुपे
दरिन्दों से भी
बचाना होगा।
देश को जो
अमानवीय तत्वों से,
बचाने का
संकल्प करता है,
उसे देशद्रोही
खुलेआम
गोली मार देता है।
कैसे पनपेगा
देशभक्ति का बीज ?
जब अंकुरित,
होने से पहले ही
उसे जड़ से
उखाड़ कर फेंक,
दिया जाता है।
हमें कानून द्वारा बनाये
खोखले सुरक्षा चक्र को,
तोड़कर बाहर
निकलना होगा
बाहर के दुश्मनों से
कहीं ज़्यादा घातक
भीतरी दुश्मन है,
बचाना होगा
अपनी सदभावना से,
देश की सुरक्षा की
खोखली होती जड़ों को,
देशद्रोही नाम की
दीमक से।
जगाना होगा
अपना सोया स्वाभिमान,
देश के विकास के हवन में
देनी होगी हम सबको
अपने निजी स्वार्थों की आहुति,
तभी सम्पन्न होगा
आज़ादी का महायज्ञll

परिचय-श्रीमती तारा प्रजापत का उपनाम ‘प्रीत’ है।आपका नाता राज्य राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाड़ा स्थित गायत्री विहार से है। जन्मतिथि १ जून १९५७ और जन्म स्थान-बीकानेर (राज.) ही है। स्नातक(बी.ए.) तक शिक्षित प्रीत का कार्यक्षेत्र-गृहस्थी है। कई पत्रिकाओं और दो पुस्तकों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं,तो अन्य माध्यमों में भी प्रसारित हैं। आपके लेखन का उद्देश्य पसंद का आम करना है। लेखन विधा में कविता,हाइकु,मुक्तक,ग़ज़ल रचती हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी पर कविताओं का प्रसारण होना है।