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मन के मनकों को बिखेरा है हम सबकी झोली में-डॉ. दवे

लोकार्पण….

इंदौर (मप्र)।

मनके दो प्रकार से बिखेरे जाते हैं, पहला भाव नकारात्मक होता है जिसमें किसी माला को तोड़कर उसके अस्तित्व को समाप्त करने का भाव प्रधान होता है, लेकिन सोमानी जी की जो काव्यकृति है मन के मनके इसके मनके उनके हृदय में बिखरे थे, जो उनकी डायरियों में एक माला के रूप में थे। उसमें से सोमानी जी ने अपने मन के मनकों को बिखेरा है हम सबकी झोली में। कवि डॉ. सोमानी के भीतर एक साहसी, जीवट और जिजीविषा वाला रचनाकार बैठा है।
यह बात विशेष अतिथि के रूप में साहित्य अकादमी, मप्र के निदेशक डॉ. विकास दवे ने कही। अवसर बना वरिष्ठ साहित्यकार और समाजसेवी डॉ. रामकिशन सोमानी द्वारा रचित काव्य कृतियाँ समय सम्बन्ध, ऋतुआ संती, मन के मनके और `आ घर लौट चलें के लोकार्पण समारोह का। चरक अस्पताल के सभागार में इस समारोह में मुख्य अतिथि पंडित सत्यनारायण सत्तन ने कहा कि, कवि की अपनी सृष्टि होती है। वह किसी के राज्य में नहीं रहता, वह अपने मनु राज्य में रहता है। सच की रुलाई को लेकर चलने वाली काली स्याही से लिखने वाले अक्षरों में शब्द ब्रह्म की स्थापना करते हुए भावनाओं से उन्हें प्राण प्रतिष्ठित करने का कर्म रामकिशन सोमानी ने किया है।
समारोह के अध्यक्ष वरिष्ठ बाल साहित्यकार डॉ. परशुराम शुक्ल रहे। ४ कृतियों के चर्चाकार के रूप में डॉ. योगेन्द्रनाथ शुक्ल, डॉ. वन्दना अग्निहोत्री एवं डॉ. विभा शुक्ला ने समीक्षा प्रस्तुत की। डॉ. शुक्ल ने कहा कि, बिना संघर्ष किए कोई कवि नहीं बन सकता। पुरानी पीढ़ी के कवि डॉ. सोमानी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि, कविताएँ स्तरीय है, जो आमजन को सत्य से परिचित कराती है। aडॉ. विभा शुक्ला ने कहा कि, डॉ. सोमानी की कविताओं में छिपा हुआ आध्यात्म हमें मन के भीतर की शांति की अनुभूति कराता है।
अध्यक्षता करते हुए डॉ. शुक्ल ने बताया कि, वह कैसे बाल साहित्यकार बने व जनजातियों के बच्चों को साहित्यिक गतिविधियों की ओर जोड़कर अपराध करने से बचाया। आपने डॉ.सोमानी के हिन्दी साहित्य की सेवा करने के जज्बे को नमन किया।

संचालन डॉ. श्यामसुन्दर पलोड़ ने किया। समारोह का संयोजन डॉ. मनोहर दास सोमानी ने किया। आभार अंजू सोमानी ने माना।

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