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मन…?

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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भागो,
सूरज पिघल रहा है
धरती की ओर,
सैलाब बढ़ रहा है…
चलो चाँद पर चलें,
चाँद यहीं गिर जाएगा
तब ?

मंगल,शनि,बुध…में
न सभी है…
सूरज की लपक लपट में,
निहारिका,आकाश गंगा ?
सब-कुछ जल रहा है…..
ओह! तब हम क्यों भागें ?
आखिर हम मनुष्य हैं,
हम सूरज का पिघलना रोक देंगे
धरती का चलना रोक देंगे,
तारों का ढलना रोक देंगे
ताकत सारी झोंक देंगे।
बस मन पर ही काबू नहीं…
बाकी ब्रम्हाण्ड सोख देंगे॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।

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