नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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माँ की कृपा के रंग (नवरात्रि विशेष)…
तू मेरी माँ दुर्गा माता,
कृपा करो माँ,
तू कृष्ण प्रेम दिला दे माँ,
मुझे निष्काम भक्ति दिला दे।
तेरा द्वार छोड़ जाऊँ नहीं माँ,
तुम तो सब पर कृपा करती माता
मुझ पर भी तू प्रेम बरसा दे माता, मुझे तुम शक्ति दो माता।
मैं रखूँ तेरी धरोहर अपने पास हमेशा माता,
कुछ भी नहीं मुझको आता, कर्म नहीं
धर्म नहीं, मान नहीं,
सम्मान नहीं, धैर्य नहीं।
कुछ भी मुझमें नहीं, फिर भी मैं सिर्फ तुमसे माँगती,
नि:स्वार्थ प्रेम-भक्ति, अपने लाड़ले भाई श्रीकृष्ण से दिला दे
अब बिन तेरी शक्ति से कैसे होंगे, कैसे होगी पूरी मेरी आस।
तू मेरी माँ दुर्गा माता,
दुनिया में बहुत हैं साधन तुझे लुभाने के लिए
कुछ भी नहीं है साधन पास मेरे, सिर्फ आँसुओं के सिवाय क्या पेश करूँ स्वागत में तेरे।
श्रद्धा के सुमन में दो बूँद आँसू समर्पण करूँ माता,
इसे स्वीकार करो और मेरा कल्याण करो माता
छम-छम करके आजा दुर्गा माता, जैसे आई थी मेरे सपनों में माता।
मेरा ऐसा मन कर दो जो संसार में न उलझे,
मेरी आँखों में सिर्फ राधे-कृष्ण की छवि दिखे।
जिह्वा पर नाम तेरा सदा विराजे, ऐसा प्रभाव भर दे मेरी माँ दुर्गा॥