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मोदी और भीष्म

पवन प्रजापति ‘पथिक’
पाली(राजस्थान)
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महाभारत तो आप सबने देखी होगी,और उसमें भी गंगापुत्र भीष्म को कौन नहीं जानता। भीष्म को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। यानि उन्हें उनकी खुद की इच्छा से ही मारा जा सकता था। युद्ध में उनसे जीत पाना असम्भव ही था।
अब यदि मोदी की राजनीति को देखा जाये तो उन्होंने भी राजनीति में कुछ इसी तरह का वरदान प्राप्त कर रखा है। अब देखिये ना पहली बार विधायक का चुनाव लड़े तो सीधे मुख्यमंत्री बने और जब तक इच्छा थी तब तक बने रहे। इस दौरान कई बार उनकी राजनीतिक हत्या की कोशिशें भी हुई,लेकिन सभी बेकार। इसके बाद उनका प्रवेश होता है राष्ट्रीय राजनीति में। पहली बार सांसद का चुनाव लड़ते हैं और सीधे प्रधानमंत्री पद की ही शपथ लेते हैं। आने वाले चुनावों में भी लगभग सारे राजनीतिक विश्लेषक देश में पुन: मोदी सरकार की भविष्यवाणी कर चुके हैं। विपक्षी दलों की हताशा भी कुछ यही बयां कर रही है। कुल मिलाकर जबसे मोदी राजनीति में आए हैं,तब से कोई उन्हें चुनौती नहीं दे पाया है।
वैसे महाभारत के भीष्म ने अपनी पराजय का राज ‘शिखंडी’ के रूप में स्वयं ही बता दिया है,लेकिन मोदी के सामने ‘शिखंडी’ की खोज विपक्षियों को स्वयं करनी होगीl

परिचय-पवन प्रजापति का स्थाई निवास राजस्थान के जिला पाली में है। साहित्यिक उपनाम ‘पथिक’ से लेखन क्षेत्र में पहचाने जाने वाले श्री प्रजापति का जन्म १ जून १९८२ को निमाज (जिला-पाली)में हुआ है। इनको भाषा ज्ञान-हिन्दी,अंग्रेजी एवं राजस्थानी का है। राजस्थान के ग्राम निमाज वासी पवन जी ने स्नातक की शिक्षा हासिल की है। इनका स्वयं का व्यवसाय है। लेखन विधा-कविता,लेख एवं कहानी है। ब्लॉग पर भी कलम चलाने वाले ‘पथिक’ की लेखनी का उद्देश्य-मानव कल्याण एवं राष्ट्रहित के मुद्दे उठाना है। आपकी दृष्टि में प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानन्द जी हैं। इनकी विशेषज्ञता- भावनात्मक कविता एवं लघुकथा लेखन है।