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यादों का पिटारा

वन्दना पुणताम्बेकर
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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यादों का पिटारा पुराना
वो पुरानी खाट,वो चाची की डांट।
वो बात-बात पर पापा की,
की बातें मोटी-मोटी।
वो माँ के हाथों की चोटी,
वो पापा की खरी-खोटी।
वो दादी के हाथ का अचार,
वो रिश्तों से महकी छोटी-सी खोली।
वो अपनो के रिश्तों की महक,
वो माँ,चाची की चूड़ियों की खनक
उन हाथों के हलवे की महक।
वो दादी के पिटारे से निकलती कहानियाँ,
वो कहानियाँ सुनती बच्चों की टोलियां।
वो चाचा-फूफा की लड़ाई,
वो मस्ती ओर पिटाई।
वो पुराने दोस्तों के साथ यादों के मेले,
वो झगड़े-झमेले।
वो रूठना-मनाना,
वो पेड़ से आम चुराना,
फिर उस आम को मिल-बांटकर खाना
वो बस्ता पुराना,फिर भी लगता सुहाना।
वो किताबों में मोर के पंख,
रंगीन सपनों के संग।
वो चाची की बात,
पापा के गुस्से वाली डांट।
वो माँ के हाथों की चूल्हे की गरम रोटी,
वो बातें सुनाती खरी-खोटी।
वो खुशियों का मेला,
संग-संग हरदम वो बचपन
था खेला।
वो गिल्ली-डंडा,राजा,मंत्री,चोर-सिपाही,
खेल-खेल में झगड़ा-पिटाई।
वो मन की बातें,
कहाँ खो गई वो बचपन की यादें।
अब सब कुछ बदला-बदला-सा,
ना वो मन,ना वो बचपन
ना वो रिश्तों में अपनेपन की महक।
वो बचपन सुहाना,पुराना जमाना,
यादों का खजाना,रिश्तों का फ़साना।
अब बदला जमाना….,
अब बदला जमाना॥

परिचय: वन्दना पुणतांबेकर का स्थाई निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। इनका जन्म स्थान ग्वालियर(म.प्र.)और जन्म तारीख ५ सितम्बर १९७० है। इंदौर जिला निवासी वंदना जी की शिक्षा-एम.ए.(समाज शास्त्र),फैशन डिजाईनिंग और आई म्यूज-सितार है। आप कार्यक्षेत्र में गृहिणी हैं। सामाजिक गतिविधियों के निमित्त आप सेवाभारती से जुड़ी हैं। लेखन विधा-कहानी,हायकु तथा कविता है। अखबारों और पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं,जिसमें बड़ी कहानियां सहित लघुकथाएं भी शामिल हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-रचनात्मक लेखन कार्य में रुचि एवं भावनात्मक कहानियों से महिला मन की व्यथा को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास है। प्रेरणा पुंज के रुप में मुंशी प्रेमचंद जी ओर महादेवी वर्मा हैं। इनकी अभिरुचि-गायन व लेखन में है।