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ये दस्तूर

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’
इंदौर (मध्यप्रदेश )
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नए साथी के
मिलने के बाद,
पुरानी मोहब्बत
अक्सर जी का,
जंजाल लगने
लगती है और…
तब शुरू होता है
उसी आशिक को
नीचे गिराने,
ऐब गिनाने,
गलत बोलने का
दौर, जिसके लिए
कभी जान तक
दे देने की बड़ी-बड़ी
कसमें खाई थी।
बस, यही बात…
फरेब का दस्तूर है॥