सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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सरहद के प्रहरी तुम भाई,
भारत के अभिमान हो तुम
बहनों के तुम बड़े लाड़ले,
माँ भारती की शान हो तुम।
राखी के पावन दिन भाई,
बहना तुमको याद करे
रहो जहाँ भी रहो सलामत,
केवल बस यह ध्यान करे।
जब आओगे तुम घर छुट्टी,
राखी तुमको बाँधूँगी
रोली अक्षत थाल सजा कर,
विजय तिलक मैं साजूँगी।
बर्फीली चोटी हो या फिर,
तपता रेगिस्तान मिले
आँधी-तूफ़ाँ आए चाहे,
दुर्गम चाहे राह मिले।
क़दम कभी न रुकने पाए,
शीश न झुकने पाए कभी
सीमा पर ले खड़े तिरंगा,
गाते जन-गण गान सभी।
माँ की ममता पिता की आशा,
भाभी का श्रृंगार हो तुम
लौट के आना मेरे भइया,
बहना का विश्वास हो तुम।
वीरों की धरती है भारत,
प्यारा हिन्दुस्तान रहे।
प्रहरी मेरे भाई जैसा,
उसका ऊँचा मान रहे॥