कुल पृष्ठ दर्शन : 219

You are currently viewing लगा लो रंग होली में

लगा लो रंग होली में

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’
बेंगलुरु (कर्नाटक)

*********************************************

लगा लो रंग होली में,
मोहब्बत रंग झोली में
मिटाओ हृदय घावों को,
समा लो मीठी बोली में।

खिलो सद्भाव कुसुम चमन में,
महको खुशबू बनो दिल में
समरसता सुभग रंगों को,
भरो खुशियाँ पिचकारी में।

अपनापन हो रिश्तों में,
रंगीला हो निश्छल मन में
मदुल मधुरिम सहज अभिनव,
मधु वसन्त रस हियतल में।

व्यवहार विनत विचारों में,
खान-पान सुभग होली में
भारत सन्तति हम एक संघ,
गुलाल रंग हों गालों में।

बरसाओ रंग होली में,
खुशियाँ मुस्कान गुलशन में
बिखेरो रंग शान्ति पूर्णिम,
गुलाबी चारु शबनम में।

फाल्गुन भोर अरुण क्षण में,
इन्द्रधनुषी सतरंगों में
जलाओ झूठ कपट नफ़रत,
होलिका हिंसा मुहब्बत में।

विविधता के रंगोली में,
जोगीरा एक रब रस में
औदार्य हिय रख सद्भावन,
परमार्थ ध्येय शुभ जीवन में।

राष्ट्र भक्ति भाव होली में,
देशप्रेम प्रगति हो मन में
बरसे गुलाल मूल्य मानव,
सुख चन्द्रहास सुयश जग में।

विजयी रंग चहुँ सीमा में,
राष्ट्रगान गूंज जनगण में
भरो शिष्ट रंग चरितामृत,
तिरंगा ध्वज लहरे नभ में।

हम साथ रहें सब एक रहें,
पौरुष संबल हम नेक रहें
आत्मनिर्भर संयम साहस,
अटल लक्ष्य अभिषिक्त रहें।

वन्दे मातरम् गाने में,
भारत माँ भक्ति रंगों में
वात्सल्य क्षमा करुणामय,
रंग बरसे सत्संगों में।

जोगीरा सा रा रा नभ में,
राधा वृन्दावन होली में
ले हाथ अबीर रंग गुलाल,
मनमोहन हमजोली में।

मन मोर मिलन सुख होली में,
नव उमंग ठठा रंगोली में।
यौवन तरंग आलिंगन प्रिय,
मृदुल आशा हमजोली में॥

परिचय-डॉ.राम कुमार झा का साहित्यिक उपनाम ‘निकुंज’ है। १४ जुलाई १९६६ को दरभंगा में जन्मे डॉ. झा का वर्तमान निवास बेंगलुरु (कर्नाटक)में,जबकि स्थाई पता-दिल्ली स्थित एन.सी.आर.(गाज़ियाबाद)है। हिन्दी,संस्कृत,अंग्रेजी,मैथिली,बंगला, नेपाली,असमिया,भोजपुरी एवं डोगरी आदि भाषाओं का ज्ञान रखने वाले श्री झा का संबंध शहर लोनी(गाजि़याबाद उत्तर प्रदेश)से है। शिक्षा एम.ए.(हिन्दी, संस्कृत,इतिहास),बी.एड.,एल.एल.बी., पीएच-डी. और जे.आर.एफ. है। आपका कार्यक्षेत्र-वरिष्ठ अध्यापक (मल्लेश्वरम्,बेंगलूरु) का है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप हिंंदी भाषा के प्रसार-प्रचार में ५० से अधिक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़कर सक्रिय हैं। लेखन विधा-मुक्तक,छन्दबद्ध काव्य,कथा,गीत,लेख ,ग़ज़ल और समालोचना है। प्रकाशन में डॉ.झा के खाते में काव्य संग्रह,दोहा मुक्तावली,कराहती संवेदनाएँ(शीघ्र ही)प्रस्तावित हैं,तो संस्कृत में महाभारते अंतर्राष्ट्रीय-सम्बन्धः कूटनीतिश्च(समालोचनात्मक ग्रन्थ) एवं सूक्ति-नवनीतम् भी आने वाली है। विभिन्न अखबारों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हैं। विशेष उपलब्धि-साहित्यिक संस्था का व्यवस्थापक सदस्य,मानद कवि से अलंकृत और एक संस्था का पूर्व महासचिव होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी साहित्य का विशेषकर अहिन्दी भाषा भाषियों में लेखन माध्यम से प्रचार-प्रसार सह सेवा करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ है। प्रेरणा पुंज- वैयाकरण झा(सह कवि स्व.पं. शिवशंकर झा)और डॉ.भगवतीचरण मिश्र है। आपकी विशेषज्ञता दोहा लेखन,मुक्तक काव्य और समालोचन सह रंगकर्मी की है। देश और हिन्दी भाषा के प्रति आपके विचार(दोहा)-
स्वभाषा सम्मान बढ़े,देश-भक्ति अभिमान।
जिसने दी है जिंदगी,बढ़ा शान दूँ जान॥ 
ऋण चुका मैं धन्य बनूँ,जो दी भाषा ज्ञान।
हिन्दी मेरी रूह है,जो भारत पहचान॥

 

Leave a Reply