इंदौर (मप्र)।
शहर की प्रख्यात लेखिका अमर खनूजा चड्ढा की २ कृति ‘उड़ीकाँ’ और ‘तू मेरा रत्त’ का विमोचन वामा साहित्य मंच की अगुवाई में हुआ। शुभारंभ माँ शारदे की आराधना के साथ हुआ।
संस्था अध्यक्ष ज्योति जैन ने स्वागत भाषण में मंच की लेखिकाओं के सृजन को रेखांकित करते हुए अतिथियों और प्रबुद्ध श्रोताओं का अभिनंदन किया। सारस्वत अतिथि प्रख्यात कवि सत्यनारायण सत्तन, प्रखर साहित्य मनीषी डॉ. विकास दवे एवं चर्चाकार प्रभु त्रिवेदी उपस्थित रहे। अतिथियों ने दोनों पुस्तकों का विमोचन किया।
श्री सत्तन व डॉ. दवे का स्वागत किया गया। लेखिका ने अपनी साहित्यिक यात्रा साझा की।
डॉ. दवे ने लेखिका को बधाई देते हुए कहा कि ‘तू मेरा रत्त’ जैसी कृतियाँ आज के दौर में मानवीय संवेदनाओं को सहेजने का सराहनीय प्रयास हैं।
श्री सत्तन ने अपने अंदाज में कहा कि अमर जी की रचनाओं में माटी की सौंधी महक, मर्यादा और रिश्तों की गर्माहट साफ महसूस होती है। उनका यह सृजन कबीर के ‘सबके हित’ वाले भाव के समान है।
संचालन की कमान वरिष्ठ साहित्यकार पद्मा राजेंद्र ने संभाली। रमिन्दर सिंह चड्ढा ने आभार व्यक्त किया।