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वत्सला स्कन्दमाता

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’
इंदौर (मध्यप्रदेश )
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भाग-५…

पंचम शक्ति स्कन्दमाता,
कार्तिकेय की वे माता
मयूरेश बैठे गोद,
शोभा अभिराम है।

पद्मासना, कांति स्वर्ण,
चतुर्भुजी, शुभ्र वर्ण
शेर की सवारी करें,
अम्बे शुभधाम है।

पीला पुष्प मनभाए,
नारंगी रंग सुहाए
सूर्यमण्डल निर्मात्री,
नयनाभिराम है।

मोहबंध से विमुक्त,
चेतना से करें युक्त
धन-धान्य पूर्ण करें,
माँ, दया का नाम है।

चतुर्दिक परिव्याप्त,
सुख, शांति होंगे प्राप्त
मोक्ष करती सुलभ,
पीड़ा में ले थाम है॥