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‘वसुधैव कुटुम्बकम’ सच कर जाएं

बबीता प्रजापति ‘वाणी’
झाँसी (उत्तरप्रदेश)
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अपना सम्मान तिरंगा….

आओ आज़ाद करें खुद को,
बंटवारे की लकीरों से
बांध रखे है जो इस मन को,
उन नफरत की जंजीरों से।

आओ केशरिया रंग का,
मान बढ़ाएं
त्याग तपस्या और समर्पण,
देश की खातिर कर दिखलाएं।

सफेद रंग से शांति लेकर,
इस जग में बिखरा आएं
अमन-चैन से रहे कुटुंब,
‘वसुधैव कुटुम्बकम’ सच कर जाएं।

हरे रंग से हरियाली लेकर,
पेड़-पौधे खूब लगाएं,
सम्मान करें दाता का,
इस बदले में कुछ न चाहें।

अशोक चक्र की तीली चौबीस,
कठोर परिश्रम सिखाएं
निरन्तरता बनी रहे जीवन में,
तभी लक्ष्य हम पाएं।

तिरंगे की शान की खातिर,
लहू जो बहाते हैं।
वे कर्मवीर ही भारत के,
शान मातृभूमि की कहलाते हैं॥

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