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विडम्बना

वीना सक्सेना
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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मातृ दिवस स्पर्धा विशेष…………


दुबई की चिकनी चमचमाती सड़कों पर कार दौड़ी चली जा रही थी,आज मैं अपने बेटी निशा और दामाद शशांक के यहां आई थी। पिछले साल निशा को एक बेटी पैदा हुई थी,लेकिन व्यस्तता के कारण मेरा दुबई आना नहीं हो पा रहा था। आज मैं पहली बार अपनी पोती को मिलूंगी,जो अब एक साल की हो गई है।
निशा और शशांक दोनों मल्टीनेशनल कम्पनी में उच्च पदों पर कार्य कर रहे थे। दुबई में होने की वजह से उनका पैकेज भी बहुत शानदार था। इसलिए,उन्होंने घर में सब सुविधाओं के साथ पोती को देखने के लिए एक आया भी रखी हुई थी। कब निशा का फ्लैट आ गया,पता ही नहीं चला।कुछ दुबई की खूबसूरती और कुछ पोती के ख्यालों में मुझे कुछ समझ ही नहीं आया,और मैं फ्लैट तक आ गई। घंटी बजाने पर सामने एक नीग्रो महिला खड़ी थी,शायद कुहू की आया थी। कुहू निशा की बेटी।
वेलकम बोलने के बाद आया अपनी आराम कुर्सी पर बैठ गई,और एक उपन्यास निकाल कर पढ़ने लगी। मैंने इधर-उधर देखकर घर का मुआयना किया,और सोचा कि शायद वह आया मुझे पानी पिलाएगी,परंतु वहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी।
मैंने स्वयं फ्रिज खोला,पानी की बोतल निकाली,और पानी पिया। इस समय ४ बज रहे थे,कुहू सो रही थीl कुहू से मिलने की उत्सुकता में मैं उसे उठाने लगी तो आया ने मना कर दिया।
कुहू अभी अपनी नानी से मिली नहीं थी। निशा मुझसे वीडियो चैटिंग करवाती थी। इसलिए,वह मुझको पहचानती तो थी पांच बजे नीग्रो ने कुहू को जगाया,और तैयार किया। इतने में शशांक और निशा दोनों घर आ गए,घर में चहल-पहल हो गईl आते ही उन्होंने यात्रा से संबंधित जानकारियां मांगीं। हम लोग आपस में गपशप करने लगे। आया थोड़ी देर बाद चली गई,और अगले दिन साढ़े आठ बजे आने का बोल गई। मैंने शशांक से पूछा-कैसी आया है तुम्हारी,पानी तक नहीं पूछा। उसने हँसकर कहा-मम्मी यहां पर सब ऐसा ही है। अपना काम खुद करो,थोड़ी देर बाद कुहू मेरे पास आई और कुछ ही क्षणों में वह मुझे पहचान गईl वह बहुत ही जल्द घुल-मिल गयी। आखिर में भी नानी बन ही गई। इतने में निशा ने सबके लिए चाय बनाई,और हम सब बालकनी में बैठकर चाय पीने लगे।
तैतीसवी मंजिल से दुबई बहुत ही सुंदर दिख रहा था। निशा ने कुहु को कमरे में ले जाकर कुछ खिलाया-पिलाया और फिर वह हमारे साथ आकर चाय पीने लगीl हम चाय पी रहे थे तो किसी बच्चे के रोने की आवाज आने लगी। सामान्य-सी बात थी इसलिए मैं भी चुप रही। थोड़ी देर बाद आवाज कुछ ज्यादा जोर से आने लगी,तो मैंने घबराकर निशा से पूछा-यह किसका बच्चा रो रहा है,तो उसने कोई जवाब नहीं दियाl अचानक मुझे ऐसा लगा कि वह बच्चा रोते-रोते गिर पड़ा है,और जोर-जोर से दरवाजा भी पीट रहा है। मैंने निशा से कहा-कहीं कुहू तो नहीं! तो उसने शशांक की तरफ देखा और मुस्कुरा दी। मैं कुछ समझ ही नहीं पाईl इतने में मुझे बच्चे के रोने के साथ गिरने की आवाज आई। मैं दौड़कर निशा और शशांक के बेडरूम की तरफ गई,देखा तो कुहू जोर-जोर से रो रही थी।उसका पूरा चेहरा आँसूओं से भीगा हुआ था। मुझे देखकर वो मुझसे लिपट गयी और गोदी में आ गयी। मैंने निशा को आकर फटकार लगाते हुए कहा-अरे इतनी जोर-जोर से बच्ची रो रही थी,और तुम्हें सुनाई नहीं दे रहा था। तुम पहचान नहीं पा रही थी कि,यह कुहू की आवाज है। उसने कहा- नहीं मम्मी,मैं पहचान गई थी यह कहू की ही आवाज है। हम उसे अभी एक डेढ़-घंटा रुलाते हैं,ताकि रात को डिनर के बाद वह आराम से सो जाए, और हमें भी सोने दे,क्योंकि सुबह हमें काम पर भी तो जाना होता है। मैं सोच में पड़ गई कि विदेशों में बच्चों की यह हालत है। दिन में आया सुला देती है,रात को माता-पिता…तो ये है कामकाजी माता-पिता की औलाद होने की विडम्बना…।

परिचय : श्रीमती वीना सक्सेना की पहचान इंदौर से मध्यप्रदेश तक में लेखिका और समाजसेविका की है।जन्मतिथि-२३ अक्टूबर एवं जन्म स्थान-सिकंदराराऊ (उत्तरप्रदेश)है। वर्तमान में इंदौर में ही रहती हैं। आप प्रदेश के अलावा अन्य प्रान्तों में भी २० से अधिक वर्ष से समाजसेवा में सक्रिय हैं। मन के भावों को कलम से अभिव्यक्ति देने में माहिर श्रीमती सक्सेना को कैदी महिलाओं औऱ फुटपाथी बच्चों को संस्कार शिक्षा देने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। आपने कई पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया है।आपकी रचनाएं अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुक़ी हैं। आप अच्छी साहित्यकार के साथ ही विश्वविद्यालय स्तर पर टेनिस टूर्नामेंट में चैम्पियन भी रही हैं। `कायस्थ गौरव` और `कायस्थ प्रतिभा` सम्मान से विशेष रूप से अंलकृत श्रीमती सक्सेना के कार्यक्रम आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर भी प्रसारित हुए हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं में अनेक लेख प्रकाशित हो चुके हैंl आपका कार्यक्षेत्र-समाजसेवा है तथा सामजिक गतिविधि के तहत महिला समाज की कई इकाइयों में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैंl उत्कृष्ट मंच संचालक होने के साथ ही बीएसएनएल, महिला उत्पीड़न समिति की सदस्य भी हैंl आपकी लेखन विधा खास तौर से लघुकथा हैl आपकी लेखनी का उद्देश्य-मन के भावों को अभिव्यक्ति देना हैl