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वृक्ष लगायें

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’
अल्मोड़ा(उत्तराखंड)

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आओ हम सब मिलकर के,
इस धरती का श्रृंगार करें।
घर-बाहर सब पेड़ लगा कर,
तन-मन शुद्ध सुखी पायेंll

फूल लगा कर हम सुगंध से,
इसकी हवा को महका देंगे।
फूल खिलेंगे रंग-बिरंगे,
मिल इसका श्रृंगार करेंगे।
हर ऋतु में नव फूल खिलेंगे,
देख सुमन-सा मन पायें।
आओ हम सब मिलकर के,
इस धरती का श्रृंगार करेंll

घर-आँगन में तुलसी दल,
अपनी सुगंध से घर भर देंगे।
गृह समीप हो नीम,तिमूरी,
तो सब रोग मिट जाएंगे।
लाख दु:खों में अमृत बनकर,
जीवन स्वस्थ सुखी कर दें।
आओ हम सब मिलकर के,
इस धरती का श्रृंगार करेंll

आम-अनार की शीतल छाया,
गर्मी में हम पाएंगे।
केला, सेब,पपीता सब,
मिलकर फल-फूल खिलायेंगे।
सदा दूसरों के प्रति जीना,
सदा इन्हीं से हम सीखें।
आओ हम सब मिलकर के,
इस धरती का श्रृंगार करेंll

हर मौसम में नए-नए फल-
फूल और फलिया पायें।
बूढ़े जीवन में भी हम नव,
कलियों-सा जीवन पायें।
हरियाली से हरा-भरा,
पावस बसंत-सा सुख पायें।
आओ हम सब मिलकर के,
इस धरती का श्रृंगार करेंll

बसंत के प्योली बुरांश,
खिलकर मन मोद बढ़ाएंगे।
काफल,जामुन और हिसालु
जैसे रस-फल खाएंगे।
वृक्षों का आनंद पायें हम,
जंगल में मंगल पायें।
आओ हम सब मिलकर के,
इस धरती का श्रृंगार करेंll

लगे पेड़ जितने भी ज्यादा,
उतना ही आराम मिले।
लकड़ी मिले इमारत ईंधन,
पशु चारा भी हरा मिले।
सदा इन्हीं के परोपकार से,
शुद्ध हवा वर्षा पायें।
आओ हम सब मिलकर के,
इस धरती का श्रृंगार करेंll

अधिक वृष्टि अरु तूफानों से,
मिट्टी सदा बचाएंगे।
तभी सदा अनाज वनस्पति,
हरा-भरा सब पाएंगे।
पशुधन खूब बढ़ा कर हम भी,
काफी दूध दही पायें।
आओ हम सब मिलकर के,
इस धरती का श्रृंगार करेंll

करें सदा वृक्षारोपण घर,
बाहर फल अरु फूलों से।
खाली धरती जहां कहीं,
उपयोगी वृक्ष लगाएंगे।
धरती का यह प्रथम पिता,
इस वृक्ष देव को नमन करें।
आओ हम सब मिलकर के,
इस धरती का श्रृंगार करें।
घर-बाहर सब पेड़ लगा कर,
तन-मन शुद्ध सुखी पायेंll

परिचय-डॉ.धाराबल्लभ पांडेय का साहित्यिक उपनाम-आलोक है। १५ फरवरी १९५८ को जिला अल्मोड़ा के ग्राम करगीना में आप जन्में हैं। वर्तमान में मकड़ी(अल्मोड़ा, उत्तराखंड) आपका बसेरा है। हिंदी एवं संस्कृत सहित सामान्य ज्ञान पंजाबी और उर्दू भाषा का भी रखने वाले डॉ.पांडेय की शिक्षा- स्नातकोत्तर(हिंदी एवं संस्कृत) तथा पीएचडी (संस्कृत)है। कार्यक्षेत्र-अध्यापन (सरकारी सेवा)है। सामाजिक गतिविधि में आप विभिन्न राष्ट्रीय एवं सामाजिक कार्यों में सक्रियता से बराबर सहयोग करते हैं। लेखन विधा-गीत, लेख,निबंध,उपन्यास,कहानी एवं कविता है। प्रकाशन में आपके नाम-पावन राखी,ज्योति निबंधमाला,सुमधुर गीत मंजरी,बाल गीत माधुरी,विनसर चालीसा,अंत्याक्षरी दिग्दर्शन और अभिनव चिंतन सहित बांग्ला व शक संवत् का संयुक्त कैलेंडर है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में बहुत से लेख और निबंध सहित आपकी विविध रचनाएं प्रकाशित हैं,तो आकाशवाणी अल्मोड़ा से भी विभिन्न व्याख्यान एवं काव्य पाठ प्रसारित हैं। शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न पुरस्कार व सम्मान,दक्षता पुरस्कार,राधाकृष्णन पुरस्कार,राज्य उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार और प्रतिभा सम्मान आपने हासिल किया है। ब्लॉग पर भी अपनी बात लिखते हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-हिंदी साहित्य के क्षेत्र में विभिन्न सम्मान एवं प्रशस्ति-पत्र है। ‘आलोक’ की लेखनी का उद्देश्य-हिंदी भाषा विकास एवं सामाजिक व्यवस्थाओं पर समीक्षात्मक अभिव्यक्ति करना है। पसंदीदा हिंदी लेखक-सुमित्रानंदन पंत,महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’,कबीर दास आदि हैं। प्रेरणापुंज-माता-पिता,गुरुदेव एवं संपर्क में आए विभिन्न महापुरुष हैं। विशेषज्ञता-हिंदी लेखन, देशप्रेम के लयात्मक गीत है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का विकास ही हमारे देश का गौरव है,जो हिंदी भाषा के विकास से ही संभव है।”