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वो प्यार का सागर थी

सौदामिनी खरे दामिनी
रायसेन(मध्यप्रदेश)

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मातृ दिवस स्पर्धा विशेष…………


वो प्यार का सागर थी,
वो ममता की मूरत थी।
अनमोल सहारा थी,
गयीं छोड़ हमें जग से।
उसे पाने को कहाँ जाएं,
वो ममता की मूरत थी…ll

उसकी प्यार भरी रहमत,
दिन-रात बरसती है।
तेरे प्यार की एक बूँद को पाने को,
मेरी चाह तरसती है।
वो प्यार का सागर थी,
ममता की मूरत थी…ll

अनमोल सहारा थी,
वो घर की लक्ष्मी थी।
एक प्यारी सूरत थी,
एक झलक जो मिल जाएl
मेरी नजर तड़पती है,
वो प्यार का सागर थी।
ममता की मूरत थी…ll

अनमोल सहारा थी,
मुझमें उसकी परछाई।
वो मेरी परछाई थी,
माँ की ममता थी।
वो मेरा मायका थी,
वो प्यार का सागर थी।
वो मेरा सहारा थी,
ममता की मूरत थी…ll

परिचय-सौदामिनी खरे का साहित्यिक उपनाम-दामिनी हैl जन्म-२५ अगस्त १९६३ में रायसेन में हुआ हैl वर्तमान में जिला रायसेन(मप्र)में निवासरत सौदामिनी खरे ने स्नातक और डी.एड. की शिक्षा हासिल की हैl व्यवसाय-कार्यक्षेत्र में शासकीय शिक्षक(सहायक अध्यापक) हैंl आपकी लेखन विधा-गीत,दोहा, ग़ज़ल,सवैया और कहानी है। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय दामिनी की लेखनी का उद्देश्य-लेखन कार्य में नाम कमाना है।इनके लिए प्रेरणापुन्ज-श्री प्रभुदयाल खरे(गज्जे भैया,कवि और मामाजी)हैंl भाषा ज्ञान-हिन्दी का है,तो रुचि-संगीत में है।