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व्यथा दर्शन:मोबाईल का गुम होना और नींद का खोना

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ 
मनावर(मध्यप्रदेश)
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मोबाईल का सभी के पास होना अनिवार्य हो गया। जीवन की आश्यकताओं में मोबाईल भी शामिल हो ही गया। पुराने समय में चिठ्ठी-पत्री कबूतर,और धीरे-धीरे डाक से भेजी जाने के बाद मोबाईल के चलन में आगे। सुबह-शाम मोबाईल हाथों में,शराब की बोतलों पर हानिकारक संदेश लिखा होता है,फिर भी लोग कहाँ मानते हैं। मोबाईल से विकिरण और ज्यादा उपयोग और निर्देशों के बावजूद लोग संग ही रखते हैं,वो एक प्रकार से घर का सदस्य बन गया हो,जिसके पास मोबाईल है वो शख्स दूसरों के सामने उसकी खूबियों का बखान करने से नहीं चूकता है। फैशन का भी हिस्सा बन गया। कई लोग-बाग़ हैं जो मोबाईल तो रखते हैं,मगर उसको सही ढंग से चलाना नहीं जानते हैं,मोबाईल चलाने के सीखने के गुरु होते हैं। जो लोग-बाग कहीं अटक जाते तो अपने उस्ताद के पास ले जाते हैं,उस्ताद जो वो कुछ जानता है वो उन्हें बता देता है। उस्ताद भी अटक जाते हैं,वो अगल-बगल झाँककर अधिक जानकर की तलाश में जाते हैं। जब मोबाईल की चार्जिंग ख़त्म होती है,तो मोबाईल धारक चिंता में मोड हो जाता है,उसे लोग चिंतनीय मोड़ का नाम दे देते हैं,जब चार्जर की जुगाड़ जम जाए। तब ऐसा महसूस होता है जैसे किसी ने गर्मी के दिनों में ठंडा पानी पिलाया हो या तपती धूप में पेड़ की छाया नसीब हो गई हो।
पहले हाट बाजारों में,आदि में जेब ही कटती थी,पर अब मोबाईल के लिए जेबकतरे भी आगे आए हैं। एक बार भीड़भरे इलाके में एक महाशय की जेब में रखा मोबाईल
जेबकतरोंबाज ने चुरा लिया। मोबाईल की रिपोर्ट दर्ज की गई। उसके लिए आवदेन-पत्र के साथ मोबाईल,पहचान,मोबाईल से संबंधित कई दस्तावेज संलग्न करे। मोबाईल सिम के कार्यालय जाकर उसी नम्बर की सिम ली गई, उसमें भी खर्चा लगा। सिम वाले ने बहत्तर घंटे में चालू होने की बात बताई। नए मोबाईल के लिए राशि की जुगाड़ उधार-पाव कर की। नए मोबाईल की पूजा की, तो दोस्तों ने मिठाई मांगी। तब ऎसा लगा जैसे कोढ़ में खाज हो गई हो। सिम चालू होने के इंतजार में दोस्त, रिश्तेदार,घर के सदस्य सभी परेशान हो गए। मोबाईल चालू हुआ तो लगा जैसे कोई सुबह का भूला शाम को घर आ गया हो। मोबाईल गुमने की व्यथा सुनाते-सुनाते खर्चा बढ़ता गया। व्यथा सुनने के लिए चाय पिलाओ,तब ही कुछ देर सुनने के लिए लोग-बाग़ रुकते हैं,और आश्वासन के साथ ‘फ़िक्र न करो’ का मूलमंत्र भी दे जाते हैं।
उधर घर में महाशय की पत्नी उनकी लू उतारती रही और चीजों को संभालकर रखने की हिदायत भी हर समय देने लगी है। मोबाईल गुम नहीं हुआ होता तो महाशय कहाँ अपनी पत्नी के इशारों पर नाचने वाले थे ? मोबाईल गुमने की चिंता से अब महाशय बार-बार अपनी जेब को निहारते रहने लगे हैं। नींद में उठकर अपने सिरहाने पड़ा मोबाईल देखते। फ़िक्र का विकिरण वाकई ताकतवर होता है।
मोबाईल चालू होने के बाद त्योहारों पर शुभकानाओं के साथ मोबाईल गुमने की व्यथा भी जोड़ देते हैं। लोग-बाग़ ये समझ नहीं पा रहे हैं कि ये शख्स रो रहा है या हँस रहा है। मोबाईल से सेल्फी ली तो उसमें चेहरे पर मुस्कान कोसों दूर। क्या करें मोबाईल गुमने का दर्द दिल में दबा था तो मुस्कान आए भी तो कहाँ से…! महाशय को एक उपाय सूझा। उसने प्याऊ पर पानी की गिलास को जंजीर में बंधा देखकर जंजीर में मोबाईल को बांधने का उपाय सोचा,मगर सामने वाले के घर पर पालतू कुत्ते के गले जंजीर बंधी देखकर उसका प्लान फिर असफल हो गया। उनको आखिर में एक बात समझ में आई-भाई मोबाईल नहीं गुमना चाहिए उससे उत्साह और खुशियां नदारद हो जाती हैं। दिमाग का दही और भन्नाट होना स्वाभाविक प्रक्रिया है,जिससे आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो जाती है।

परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ है। २ मई १९६२ को उज्जैन में जन्में श्री वर्मा का स्थाई बसेरा मनावर जिला-धार (म.प्र.)है। भाषा ज्ञान हिंदी और अंग्रेजी का रखते हैं। आपकी शिक्षा हायर सेकंडरी और आयटीआय है। कार्यक्षेत्र-नौकरी( मानचित्रकार के पद पर सरकारी सेवा)है। सामाजिक गतिविधि के तहत समाज की गतिविधियों में सक्रिय हैं। लेखन विधा-गीत,दोहा,हायकु,लघुकथा कहानी,उपन्यास, पिरामिड, कविता, अतुकांत,लेख,पत्र लेखन आदि है। काव्य संग्रह-दरवाजे पर दस्तक,साँझा उपन्यास-खट्टे-मीठे रिश्ते(कनाडा),साझा कहानी संग्रह-सुनो,तुम झूठ तो नहीं बोल रहे हो और लगभग २०० साँझा काव्य संग्रह में आपकी रचनाएँ हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं में भी निरंतर ३८ साल से रचनाएँ छप रहीं हैं। प्राप्त सम्मान-पुरस्कार में देश-प्रदेश-विदेश (कनाडा)की विभिन्न संस्थाओं से करीब ५० सम्मान मिले हैं। ब्लॉग पर भी लिखने वाले संजय वर्मा की विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-मातृभाषा हिन्दी के संग साहित्य को बढ़ावा देना है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद,तो प्रेरणा पुंज-कबीर दास हैंl विशेषज्ञता-पत्र लेखन में हैl देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-देश में बेरोजगारी की समस्या दूर हो,महंगाई भी कम हो,महिलाओं पर बलात्कार,उत्पीड़न ,शोषण आदि पर अंकुश लगे और महिलाओं का सम्मान होl