कुल पृष्ठ दर्शन : 74

शिक्षित बनो, संगठित रहो

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
*****************************************

डॉ. भीमराव आम्बेडकर जयंती विशेष…

शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो,
था नारा भीमराव आम्बेडकर का, नेता दलितों के।

भीवा, भीमा, बाबा साहब आम्बेडकर, भीमराव,
बोधिसत्व नाम माता भीमाबाई, पिता रामजी राव।

ये महार जाति के थे, बाद में बौद्ध धर्म अपनाया,
जन्म चौदह अप्रैल १८९१ स्थान महू इंदौर आया।

पत्नी रमाबाई और सविताबाई पुत्री इन्दु आम्बेडकर,
पुत्र थे उनके रमेश आम्बेडकर और राजरत्न आम्बेडकर।

भारत सरकार ने इन्हें प्रथम कानून मंत्री बनाया,
कुछ लोगों ने इन्हें संविधान निर्माता भी बताया।

इनकी लाईब्रेरी में पचास हजार पुस्तकें होती थी,
एक साल में सोलह सौ पुस्तकें इन्होंने पढ़ डाली थी।

उनकी रचना थी भारत का राष्ट्रीय अंश, जाति का उच्छेद,
भगवान बुद्ध और उनका धर्म, शुद्र कौन औेर कैसे ?

पाकिस्तान पर विचार, संघ बनाम स्वतंत्रता किताब,
वकील, प्रोफेसर, राजनीतिज्ञ और शिक्षा थी व्यवसाय।

गौतम बुद्ध, हरिश्चंद्र और कबीर दास थे उनके प्रेरक।
जन्म स्थान महू और राज्य था उनका मध्यप्रदेश।

शेड्यूल कास्ट फेडरेशन, भारतीय रिपब्लिकन व लेबर पार्टी,
अध्यक्ष बने अब वे भारत के संविधान मसौदा समिति।

उन्होंने बहिष्कार हितकारिणी सभा की स्थापना की,
अछूतों के उद्धार हेतु ‘मूकनायक’ पत्रिका शुरू की।

व्याप्त जाति प्रथा से दुखी होकर १४ अक्टूबर १९५६ आया,
दुखी होकर अपने अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया।

भारत विकास क्षेत्र में उनका हुआ महत्वपूर्ण योगदान,
महिला अधिकार, श्रमिक अधिकार औेर भारतीय संविधान।

पुरस्कार मिला बोधिसत्व १९५६, १९९० ‘भारत रत्न’,
२००४ पहले कोलंबियन अहेड ऑफ देयर टाइम।

६ दिसंबर १९५६ को उनका नई दिल्ली में हुआ निधन,
अंतिम पुरस्कार उन्हें मिला २०१२ में द ग्रेटेस्ट इंडियन॥