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साँझ

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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आजकल राधिका दिन पर दिन बहुत उदास और चुप-सी रहने लगी थी। भीड़ मे होकर भी अकेली सी,बोलती हुई भी मौन-सी हो गई थी।
केशव से भी कम ही बात होती थी। केशव उसके पति,जिससे वह एक समय था जब दिनभर बक-बक करती रहती थीं,पर आजकल दोनों में जैसे शीत युद्ध छिड़ गया हो। धीरे-धीरे दोनों के मध्य अलगाव होता जा रहा था। एक-दूसरे से घण्टों बिना बात किए एक घर में रह रहे थे। बच्चे दोनों बाहर अपनी-अपनी जिंदगी मे व्यस्त थे,शायद यही कारण था दोनों की चिड़चिड़ाहट का।
अब राधिका और उसके पति में यदि कभी दिनभर में बात भी होती तो अक़्सर हर बात पर जिरह ही करते थे,या फिर सोशल मीडिया पर सुकून तलाश करते नजर आते। राधिका को लग रहा था जैसे उसका जीवन थम-सा गया है। अब उसके पास कुछ करने को रहा नहीं। एक दिन सुबह इन्हीं ख्यालों में गुम वह अपनी छत से खड़ी हुई मुँडेर पर अपनी ठुड्डी टिकाए हुए सामने के वृक्ष पर बैठी गौरैया को ध्यान से देख रही थी-कि कैसे उसने एक-एक तिनके को इकठ्ठा कर अपना घोंसला बनाया था,पर अब वह अकेली इस शाख से उस शाख पर फुदक रही थी। उस वक़्त उसकी चहचहाहट से ऐसा लग रहा था,मानो जैसे कुछ गीत गुनगुना रही हो,पर वह थक नहीं रही थी,जबकि उसके साथ भी कोई नहीं था। इसके बावजूद वह चहक रही थीं। अचानक राधिका के दिमाग़ में बिजली-सी कौंधी कि…अभी उसके जीवन में भी सब-कुछ खत्म नहीं हुआ। उसे भी अपने घरौंदे को सहेजना होगा। इस जिंदगी की साँझ को गुनगुना बनाना होगा। कहते हैं न कई बार बिखराव भी जरूरी है,समेटने के लिए। संध्या के समय जैसे ही केशव घर आए,राधिका आज चाय देकर अपना मोबाईल लेकर नहीं बैठी,बल्कि अपने बीते दिनों के अच्छे पलों को केशव को याद दिलाने लगी। केशव भी बड़ी रोचकता से उसकी बातों को सुन रहा था।दोनों के बीच जाने किस बात पर हँसी का फव्वारा छूट पड़ा। आज दोनों के मोबाईल टेबल पर पड़े थे और दोनों उस शोर करती हुई गौरैया की चहचहाहट को सुन रहे थे।

परिचय-डॉ. वंदना मिश्र का वर्तमान और स्थाई निवास मध्यप्रदेश के साहित्यिक जिले इन्दौर में है। उपनाम ‘मोहिनी’ से लेखन में सक्रिय डॉ. मिश्र की जन्म तारीख ४ अक्टूबर १९७२ और जन्म स्थान-भोपाल है। हिंदी का भाषा ज्ञान रखने वाली डॉ. मिश्र ने एम.ए. (हिन्दी),एम.फिल.(हिन्दी)व एम.एड.सहित पी-एच.डी. की शिक्षा ली है। आपका कार्य क्षेत्र-शिक्षण(नौकरी)है। लेखन विधा-कविता, लघुकथा और लेख है। आपकी रचनाओं का प्रकाशन कुछ पत्रिकाओं ओर समाचार पत्र में हुआ है। इनको ‘श्रेष्ठ शिक्षक’ सम्मान मिला है। आप ब्लॉग पर भी लिखती हैं। लेखनी का उद्देश्य-समाज की वर्तमान पृष्ठभूमि पर लिखना और समझना है। अम्रता प्रीतम को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाली ‘मोहिनी’ के प्रेरणापुंज-कृष्ण हैं। आपकी विशेषज्ञता-दूसरों को मदद करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिन्दी की पताका पूरे विश्व में लहराए।” डॉ. मिश्र का जीवन लक्ष्य-अच्छी पुस्तकें लिखना है।

 

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