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साहित्य में जीवन सार

मुकेश कुमार मोदी
बीकानेर (राजस्थान)
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साहित्य के साए में, पूरी होगी खुद की तलाश,
अपनी अन्तर्चेतना का, होगा खुद को आभास।

मार्ग मिलेगा खुद को, नए विचार पर चलने का,
पवित्र दृष्टि से अपने ही, जीवन को बदलने का।

अज्ञान अंधकार मिटाएगा, साहित्य का प्रकाश,
केवल साहित्य से ही होगा, समाज का विकास।

एक ही रचना का दीपक, करेगा पथ को रोशन,
मन में नव रचनाओं का, खिल जाएगा गुलशन।

चरित्र का चित्रण केवल, साहित्य से हो पाएगा,
सच्चा आनन्द केवल, साहित्य से मिल पाएगा।

साहित्यकार ही करता, समाज का अनुसन्धान,
अनेक समस्याओं का, वही बतलाता समाधान।

हमारी संस्कृति की रक्षा, शुद्ध साहित्य से होती,
मानवता भी चैन से, साहित्य की गोद में सोती।

साहित्य करता संसार में, दिव्य ज्ञान का प्रसार,
केवल साहित्य में देखो, अपने जीवन का सार॥

परिचय – मुकेश कुमार मोदी का स्थाई निवास बीकानेर में है। १६ दिसम्बर १९७३ को संगरिया (राजस्थान)में जन्मे मुकेश मोदी को हिंदी व अंग्रेजी भाषा क़ा ज्ञान है। कला के राज्य राजस्थान के वासी श्री मोदी की पूर्ण शिक्षा स्नातक(वाणिज्य) है। आप सत्र न्यायालय में प्रस्तुतकार के पद पर कार्यरत होकर कविता लेखन से अपनी भावना अभिव्यक्त करते हैं। इनकी विशेष उपलब्धि-शब्दांचल राजस्थान की आभासी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक प्राप्त करना है। वेबसाइट पर १०० से अधिक कविताएं प्रदर्शित होने पर सम्मान भी मिला है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-समाज में नैतिक और आध्यात्मिक जीवन मूल्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास करना है। ब्रह्मकुमारीज से प्राप्त आध्यात्मिक शिक्षा आपकी प्रेरणा है, जबकि विशेषज्ञता-हिन्दी टंकण करना है। आपका जीवन लक्ष्य-समाज में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों की जागृति लाना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-‘हिन्दी एक अतुलनीय, सुमधुर, भावपूर्ण, आध्यात्मिक, सरल और सभ्य भाषा है।’

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