ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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मन कुछ कहता है…(‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)….
दिल करता है, छू लूँ गगन को,
दिल करता है, पंछी बन जाऊँ।
दिल करता है, पर्वत पर चढूं,
दिल करता है, खूब चिल्लाऊँ।
दिल करता है, हिल स्टेशन घूमने जाऊँ,
दिल करता है, बादलों की सैर कर आऊँ।
दिल करता है, चंद्रमा को निहारूँ,
चकोर बन कर, सैर कर आऊँ।
दिल करता है, गंगा में कूद लगाऊँ,
दिल करता है, खूब तैराकी कर लूँ।
दिल करता है, सबसे बातें करूँ,
दिल करता है, खूब ठहाका लगाऊँ।
दिल करता है, मीठे बोल सुनाऊँ,
दिल करता है, खूब श्रृंगार करूँ।
दिल करता है, विदेश घूम आऊँ,
दिल करता है, मंदिर हो आऊँ।
दिल करता है, खूब नाम कमाऊँ,
दिल करता है, सभी को अपना बनाऊँ।
दिल करता है, दिल का हाल सुनाऊँ,
दिल करता है, सबके दुख को बाँटूं।
दिल करता है, प्रधानमन्त्री बन जाऊँ,
दिल करता है, सब गरीबी मिटा दूँ।
दिल करता है, गौतम बुद्ध बन जाऊँ,
दिल करता है, ऊँच-नीच का भेद मिटाऊँ।
दिल करता है, लता दीदी बन जाऊँ,
दिल करता है, मीठे बोल से जग हर्षाऊँ।
दिल करता है, कोई भी ना दुश्मन हो,
दिल करता है, हर कोई अपना हो।
दिल करता है, ये जग सुन्दर बन जाए,
दिल करता है, सपना सच हो जाए॥