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हतप्रभ नन्हा पौधा

ऋचा सिन्हा
नवी मुंबई(महाराष्ट्र)
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‘विश्व पर्यावरण दिवस’ पर,
हतप्रभ था नन्हा पौधा प्यारा
बहुत दुखी था देख कर वह,
दुनिया का ऐसा चरित्र न्यारा।

सुबह तड़के ही शुरू हुआ,
अद्भुत एक अनोखा-सा खेल
गमले में सजाकर उसको,
ले गए एक बड़े मंच धकेल।

सजा दिया था गमले को,
फिर रंग-बिरंगे रिबनों से
दौर चला व्याख्यान का,
कविताओं और संगीत का।

वृक्षों की विवेचना हुई,
पोस्टर बने संवेदना हुई
दे दिया पुरस्कार में फिर,
उस नन्हें से पौधे को फिर।

सुन कर अपनी तारीफ़ वो,
फूल कर कुप्पा हुआ
और एक बड़े मैदान में वो,
सबने मिलकर रोप दिया।

देकर उसे दुलार बहुत-सा,
खाद-पानी से सींच दिया
नन्हा पौधा हतप्रभ-सा,
मानव का रूप समझ गया।

पूरे साल जो काटे वृक्षों को,
क्यों दिखाएं त्रिया चरित्र।
ख़त्म करे जो जंगलों को,
रोपें नन्हें पौधे को बन पवित्र॥

परिचय – ऋचा सिन्हा का जन्म १३ अगस्त को उत्तर प्रदेश के कैसर गंज (जिला बहराइच) में हुआ है। आपका बसेरा वर्तमान में नवी मुम्बई के सानपाड़ा में है। बचपन से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रुचि रखने वाली ऋचा सिन्हा ने स्नातकोत्तर और बी.एड. किया है। घर में बचपन से ही साहित्यिक वातावरण पाने वाली ऋचा सिन्हा को लिखने,पढ़ने सहित गाने,नाचने का भी शौक है। आप सामाजिक जनसंचार माध्यमों पर भी सक्रिय हैं। मुम्बई (महाराष्ट्र)स्थित विद्यालय में अंग्रेज़ी की अध्यापिका होकर भी हिंदी इनके दिल में बसती है,उसी में लिखती हैं। इनकी रचनाएँ विभिन्न पत्रिकाओं में छप चुकीं हैं,तो साझा संग्रह में भी अवसर मिला है।

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