नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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जैसे स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा लहराता है,
उसी प्रकार धरती पर भी हरियाली छा जाती है
हरियाली भी अपना तिरंगा-सा रूप ओढ़ लेती है,
और अपना देश हरा-भरा नज़र आता है।
हरियाली भी अपना रंग बदलती है,
कभी लाल चुनरी पहनती है
कभी हरी चुनरी पहनती है,
कभी पीली चुनरी ओढ़ लेती है।
हिमालय भी सफेद बर्फ की चुनरी पहनता है,
प्रकृति भी तरह-तरह के खेल दिखाती है
हर मौसम में अपना नया रूप सजाती है,
धरती को सुंदर और मनोहर बनाती है।
हरा रंग आशा का प्रतीक होता है,
पीला रंग सम्मान का प्रतीक होता है
श्वेत रंग शांति का प्रतीक होता है,
इन रंगों से जीवन में भी हरियाली छा जाती है।
जब खेतों में धान की फसल लहलहाती है,
लगता है पूरी धरती हरी-भरी हो गई
हरी चादर ओढ़े यह धरती मुस्कुराती है,
और हरियाली भरपूर फसल का संदेश सुनाती है।
जब पीली सरसों खिल उठती है,
लगता है जैसे धरती ने सुनहरा श्रृंगार किया हो।
सरसों का पीला फूल मन को लुभाता है,
इस तरह धरती की हरियाली भी तिरंगा बन जाती है॥