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हल्ला बोल

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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रोना छोड़…हल्ला बोल,
चुप्पी तोड़…हल्ला बोल।

अत्याचार…अपचार को,
सहना छोड़…हल्ला बोल।

आतताईयों…हिंसक की,
बाँह मरोड़…हल्ला बोल।

बलात्काररियों…गुंडे की,
आँखें फोड़…हल्ला बोल।

अत्याचारी…खूनी की,
टांगें तोड़…हल्ला बोल।

देशघाती…राष्ट्र द्रोही,
हैं ये कोढ़…हल्ला बोल।

मुफ्तखोर जन जो बनाए,
नेता छोड़…हल्ला बोल।

दहेज लालची…लोग से,
नात न जोड़…हल्ला बोल।

आतंक, अलगाव, अधर्म,
लगा न होड़…हल्ला बोल।

अपराधी जो…सफेदपोश,
मटकी फोड़…हल्ला बोल।

अर्थव्यवस्था…हो सुधार,
ताबड़तोड़…हल्ला बोल।

बेरोजगारी…की मार,
डांवाडोल…हल्ला बोल।

सत्ता लोभी…नेता की,
कुर्सी गोल…हल्ला बोल।

खाए जो…सरकारी कोष,
पगड़ी खोल…हल्ला बोल।

धरती…पर्यावरण रक्षण,
स्वार्थ न तौल…हल्ला बोल।

जल संरक्षण, जन-जन सुगम,
पीटो ढोल…हल्ला बोल।

दरिंदे द्वेषी…लोगों को,
दो नहीं झोल…हल्ला बोल।

जाति-पंथ…नाम लड़ाना,
है बकलोल…हल्ला बोल।

कानून भक्षक…राक्षस को,
विष दो घोल…हल्ला बोल।

घुसपैठियों का करें मिल,
डिब्बा गोल…हल्ला बोल।

विश्व शांति बन्द हो वार,
प्रज्ञा खोल…हल्ला बोल।

दाना-दाना…महँगाई,
हुए अनमोल…हल्ला बोल।

नींद से उठ…जनता जाग,
आँखें खोल…हल्ला बोल॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।

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