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हार के बाद ही जीत है

डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती
बिलासपुर (छतीसगढ़)
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ढलते-ढलते दिन बोल रहा,
अंधियारी रात के बाद
फिर एक नई सुबह आएगी,
आशा की किरण लाएगी।

पक्षी चहक कर गाएंगे,
फूल मुस्कुराएंगे और
कलियाँ खिलखिलाएंगी
तो फिर क्यों है मन उदास!

धूप के बाद ही,
रिमझिम फुहार है
रास्ते हों गर टेढे़-मेढे़
मंजिल उस पार है।

चल पड़ नई राह पर,
विश्वास को अंगीकार कर।
दुनिया की पुरानी रीत है,
हार के बाद ही जीत है॥

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