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हिन्दी को सशक्त करें

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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जन-मन का भाव हिन्दी (हिन्दी दिवस विशेष)….

भारत में हर वर्ष १४ सितम्बर को ‘हिन्दी दिवस’ मनाया जाता है। १९४९ में संविधान सभा ने हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। आज करोड़ों लोग हिन्दी बोलते और समझते हैं। हिन्दी हमारी भाषा ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
   हिन्दी एक सरल और सहज भाषा है। फिर भी आज शिक्षा, नौकरी, कम्प्यूटर और इंटरनेट जैसे क्षेत्रों में अंग्रेजी को अधिक महत्व दिया जाता है। अंग्रेजी सीखना आवश्यक हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हम अपनी हिन्दी भाषा को भूल जाएँ। हमें हिन्दी को भी सम्मान और उचित स्थान देना चाहिए।
   हिन्दी को सशक्त बनाने का सबसे अच्छा तरीका है, कि हम उसका अधिक से अधिक प्रयोग करें। घर में परिवार के साथ हिन्दी में बातचीत करें और बच्चों को हिन्दी पढ़ने, लिखने और बोलने के लिए प्रेरित करें। इससे आने वाली पीढ़ी अपनी भाषा से जुड़ी रहेगी और उसमें अपनेपन की भावना पैदा होगी।
हिन्दी साहित्य को भी बढ़ावा देना जरूरी है। प्रेमचंद, महादेवी वर्मा और हरिवंश राय बच्चन जैसे महान साहित्यकारों की रचनाएँ पढ़नी चाहिए। स्कूल और कॉलेजों में हिन्दी से जुड़ी प्रतियोगिताएँ, साहित्यिक कार्यक्रम और अन्य गतिविधियाँ आयोजित करनी चाहिए। इससे बच्चों और युवाओं में हिन्दी के प्रति रुचि बढ़ेगी।
  आज हिन्दी का प्रयोग साहित्य के साथ-साथ कम्प्यूटर, इंटरनेट और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है। हमें इन क्षेत्रों में हिन्दी के प्रयोग को और बढ़ावा देना चाहिए। हिन्दी में अच्छी और सरल सामग्री तैयार करके उसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना चाहिए।
हिन्दी को सशक्त करने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। १४० करोड़ भारतीय मिलकर हिन्दी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भाषा का सम्मान करना चाहिए और उसके प्रचार-प्रसार के लिए अपने स्तर पर प्रयास करना चाहिए।
   हिन्दी हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमें हिन्दी बोलने, पढ़ने और लिखने में गर्व महसूस करना चाहिए। अपनी भाषा को सम्मान देना और आने वाली पीढ़ी तक उसे पहुँचाना ही हिन्दी को सशक्त बनाने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है।