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होली है

शम्भूप्रसाद भट्ट `स्नेहिल’
पौड़ी(उत्तराखंड)

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फाल्गुन प्यारा आया रे,कि खेलते होली हैं बृज की,
क्योंकि बसंत बहार है।
बृज की जो होली कृष्ण ने खेली,
रास रची लीला सभी गोपी चेली।
मथुरा के वासी भी,कि प्यार से खेलते होली;
क्योंकि बसंत बहार है॥
देवदूत प्रह्लाद नाम है जिसका,
मारने के बहाने से जल गई होलिका।
धरम की जै हुई है, कि खेलते होली हैं तब से;
क्योंकि बसंत बहार है॥
स्वागत बसंत का करते हैं सारे,
चहुंओर गन्ध ये खिले फूल प्यारे।
हरियाली छाई है,कि खेलते होली हैं बृज की;
क्योंकि बसंत बहार है॥
प्रेम-मिलन का ये पर्व है सबका,
मिलते हैं छोड़ के द्वेष सब मनका।
नहीं भेद धर्म का है,कि खेलते होली हैं बृज की;
क्योंकि बसंत बहार है॥
देवर-भाभी का प्रेम है इसमें,
रंग-गुलाल का मेल है जिसमें।
मिलते हैं प्यार से ये,कि खेलते होली हैं बृज की;
क्योंकि बसंत बहार है॥
पास-पड़ोस में मेल-मिलन का,
बनाते हैं गुजिया इजहार प्रेम का।
प्यार से खाते-खिलाने हैं,कि खेलते होली हैं बृज की;
क्योंकि बसंत बहार है॥
स्याली-जीजाजी का मौसम आया,
प्यारे बसंत का सुगंध है छाया।
रंगभरी पिचकारी से, कि खेलते होली हैं बृज की;
क्योंकि बसंत बहार है॥
फाल्गुन प्यारा आया रे,कि खेलते होली हैं बृज की;
क्योंकि बसंत बहार है॥
परिचय-शम्भूप्रसाद भट्ट का साहित्यिक उपनाम-स्नेहिल हैl जन्मतिथि-२१आषाढ़ विक्रम संवत २०१८(४ जुलाई १९६१) और जन्मस्थान ग्राम भट्टवाड़ी (रूद्रप्रयाग,उत्तराखण्ड) हैl आप वर्तमान में उफल्डा(श्रीनगर पौड़ी,उत्तराखंड) में रहते हैं,जबकि स्थाई निवास ग्राम-पोस्ट-भट्टवाड़ी (जिला रूद्रप्रयाग) हैl उत्तराखण्ड राज्य से नाता रखने वाले श्री भट्ट कला एवं विधि विषय में स्नातक होने के सात ही प्रशिक्षु कर्मकाण्ड ज्योतिषी हैंl आप राजकीय सेवा से स्वैच्छिक रुप से सेवानिवृत्त हैंl  सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत विविध साहित्यिक व सामाजिक संस्थाओं में प्रतिभागिता-सहयोगात्मक मदद करते हैंl शम्भूप्रसाद भट्ट की लेखन विधा-पद्यात्मकता तथा गद्यात्मकता के तहत सम-सामयिक लेख,समीक्षात्मक एवं शोध आलेख आदि हैl ३ पुस्तकें प्रकाशित होने के साथ ही तथा देश के अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हुआ हैl आपको साहित्यिक-सामाजिक कार्योंं हेतु स्थानीय, राज्य, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ४० से अधिक उत्कृष्टतम सम्मान-पुरस्कार प्राप्त हुए हैंl साथ ही अलंकरणों से भी विभूषित हो चुके हैंl इनकी दृष्टि में विशेष उपलब्धि-सन्तुष्टिपूर्ण जीवन और साहित्यिक पहचान ही हैl श्री भट्ट की लेखनी का उद्देश्य-धर्म एवं आध्यात्म,वन एवं पर्यावरणीय,सम-सामयिक व्यवस्था तथा राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ ही मातृभाषा हिंदी का बेहतर प्रचार-प्रसार करना हैl