सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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मेरे भाग्य विधाता… (शिक्षक दिवस विशेष)…
अक्षर-अक्षर ज्ञान सिखाता
अर्थों का विस्तार करे,
मूक हृदय की सुप्त चेतना-
विकसित कर अज्ञान हरे।
संशय के दुर्गम पथ पर जो
प्रज्ञा का विस्तार करे,
स्वार्थ संकुचित मानस में-
मानवता निर्माण करे।
विपदाओं के भ्रमर जाल में
धैर्य सुधा बरसाते हैं,
पराजय के विषम क्षणों में-
जय का मंत्र सुनाते हैं।
राष्ट्र-चेतना के निर्माता
पीढ़ी-पीढ़ी गढ़ते हैं,
शील,चरित्र,सत्य-निष्ठा के-
बीज हृदय में बोते हैं।
गुरु से ही शुभ दृष्टि मिली है,
जीवन-पथ का ज्ञान मिला।
जीवन के उन्नयन में अपने-
स्वयं मिलन का मार्ग मिला॥