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जिनसे है अस्तित्व हमारा

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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पितृपक्ष का दिन अंतिम यह
तर्पण-श्राद्ध की बेला का,
मौन प्रार्थना करने बैठे
पूर्वज अपने प्रिय जन का।

जिनके त्याग-सिक्त जीवन से
अंतर्मन का दीप जलाया,
जिनके श्रम, संस्कार, स्नेह से
हमने अपना आज बनाया।

जीवन-पथ को दिशा मिली
उनके प्रति ऋण-बद्ध रहें हम,
जिनसे है अस्तित्व हमारा
उनको शत-शत नमन करें हम।

रूखा-सूखा जो कुछ भी है
अर्पण करते आज आपको,
मिले सदा आशीष बड़ों का
मत मस्तक प्रणाम आपको।

बनी रहे बस कृपा आपकी,
बना रहे आशीष सदा।
स्मृति, सीख आपकी हर पल
याद करें हम यहाँ-वहाँ॥