प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
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नाना पाटेकर का नाम सदा ही अभिनय में चोखा है,
विविध आयाम हैं, खुली हवा का महकता झरोखा है।
मुँहफट इंसान अपनी भूमिकाओंं में भी मिसाल रहा,
नाना पाटेकर जी, तुम्हारा नित कमाल भरा काम रहा।
दमन, प्रतिघात, परिन्दा, अग्निसाक्षी और क्रांतिवीर,
जय हो, जय हो, जय हो, हे! तिरंगा के परमवीर।
तुमने अभिनय को दिया एक अलग ही रूप-रंग,
तुम्हारा स्वाभाविक अंदाज़ देख रह गये सभी दंग।
नाना पाटेकर तुम तड़क-भड़क से रहे नित ही दूर,
फिर भी अपनी अदाओं से बिखेरते रहे हरदम नूर।
भीड़-भाड़ से अलग रह, तुम गोवा में जाकर बसे,
तुम्हें पात्रों में देख लोग रोये, मुस्कराये और हँसे।
अचानक तुम यूँ चले गये दुनिया से नाना पाटेकर,
बुरा हाल है अब कलाप्रेमियों का नित रो-रोकर।
पेश हैं आदर सुमन और भावभरी विनम्र श्रद्धांजलि,
दिलों पर राज करने वाले ‘नाना’ स्वीकारो पुष्पांजलि॥