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‘ढाई आखर प्रेम का’ के लोकार्पण में बही काव्य रस की धारा

भोपाल (मप्र)।

अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की मध्य प्रदेश इकाई की अगस्त मास की काव्य चौपाल संस्था की सचिव विनीता राहुरीकर के आवास पर रखी गई। इस अवसर पर ५१ लघुकथाकारों के प्रेम पर आधारित लघुकथा संग्रह ‘ढाई आखर प्रेम का’ (संपादन संतोष श्रीवास्तव, मुजफ्फर इकबाल सिद्दीकी) का लोकार्पण हुआ। इसमें लघुकथा शोध केंद्र की संस्थापक लघुकथाकार कांता राय भी मौजूद रहीं।
         मंच की काव्य चौपाल का अलाव अपने नियत समय पर अपनी ऊष्मा के साथ प्रज्जवलित हुआ। संस्था की वरिष्ठ सदस्य मधुलिका सक्सेना ‘मधुआलोक’ की कविता से कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। बरसात के मौसम में मन में उठते  सभी भावों को उन्होंने शब्दों में पिरोया। ‘वर्षा’ कविता में क्षमा पांडेय ने वर्षा ऋतु  का अभिनंदन किया-“वर्षा ऋतु तुम्हें सदा प्रणाम।”
   शेफालिका श्रीवास्तव ने समय को उसकी भागती गति को कम करने की गुहार लगाते हुए एक सुंदर कविता चौपाल के आंगन में सभी को सुनाई-“ऐ समय थोड़ा रुक जा, मेरे दिल की कुछ सुन जा…” तो विनीता राहुरीकर ने वियोग श्रृंगार की गहरे भावार्थ की कविता सुनाई और सबका मन मोह लिया।
   संस्था अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने हास्य रस की कविता से सबके चेहरे पर मुस्कान ला दी-“एक जमाना था कि मोहब्बत में कबूतर जरूर रहता था, वह न हो तो आशिकों का पैगाम रुका रहता था…”। अश्लेषा राहुरीकर, सरोज लता सोनी और कांता रॉय आदि ने भी कविता सुना कर सबकी सहमति पाई।
   सफल संचालन रानी सुमिता ने मनमोहक माहौल बनाते हुए किया।