आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’
धनबाद (झारखंड )
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आजादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)…
आओ बच्चों तुम्हें बताऊँ,
हिन्दुस्तान की सैर कराऊँ
आजादी की गाथा सुनाऊँ,
चलो तुम्हें लाल किला दिखाऊँ।
भारत की राजधानी घुमाऊँ,
नयी दिल्ली की शान दिखाऊँ
इंडिया गेट पर शीश झुकाऊँ,
लाल किले पर तिरंगा लहराऊँ,
राष्ट्रपति भवन-द्रौपदी मुर्मू जी का धाम दिखाऊँ।
दिल्ली का कुतुब मीनार दिखाऊँ,
शीशगंज गुरुद्वारे में शीश नवाऊँ
राजघाट-राष्ट्रपिता की समाधि ले जाऊँ,
शांतिवन-प्रथम प्रधानमंत्री का दर्शन कराऊँ
सदैव अटल-श्रद्धेय अटल जी का स्मरण कराऊँ।
वोट क्लब, संसद भवन दिखाऊँ,
अक्षरधाम का दिव्य दर्शन कराऊँ
छतरपुर के मंदिर घुमाऊँ,
मेट्रो की सैर कराऊँ
नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली के रेल द्वार दिखाऊँ।
ऊँचे-ऊँचे महल अटारी दिखाऊँ,
इंदिरा गाँधी हवाई अड्डा घुमाऊँ,
भारत का सर्वोच्च न्यायालय दिखाऊँ,
इंद्रप्रस्थ में बच्चों के मेले ले जाऊँ।
बिरला मंदिर, काली बाड़ी घुमाऊँ,
चलो तुम्हें राष्ट्रनायकों से मिलवाऊँ,
तिरंगे के नीचे हम सब,
एकता का गीत गाऊँ।
आजादी का पर्व मनाऊँ,
मिठाई खाऊँ, तुम्हें खिलाऊँ
हाथ में तिरंगा लिए दिल्ली घुमाऊँ,
जय हिन्द, जय भारत, भारत माता की जय
वन्दे मातरम् का जयघोष लगाऊँ।
‘वन्दे मातरम्’ कहता जाऊँ,
‘वन्दे मातरम्’ गाता-गाता घर वापस आऊँ॥
परिचय-सिंदरी (धनबाद, झारखंड) में १४ दिसम्बर १९६४ को जन्मे आचार्य संजय सिंह का वर्तमान बसेरा सबलपुर (धनबाद) और स्थाई बक्सर (बिहार) में है। लेखन में ‘चन्दन’ नाम से पहचान रखने वाले संजय सिंह को भोजपुरी, संस्कृत, हिन्दी, खोरठा, बांग्ला, बनारसी सहित अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान है। इनकी शिक्षा-बीएस-सी, एमबीए (पावर प्रबंधन), डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल) व नेशनल अप्रेंटिसशिप (इंस्ट्रूमेंटेशन डिसिप्लिन) है। अवकाश प्राप्त (महाप्रबंधक) होकर आप सामाजिक कार्यकर्ता व रक्तदाता हैं तो साहित्यिक गतिविधि में भी सक्रियता से राष्ट्रीय संस्थापक-सामाजिक साहित्यिक जागरुकता मंच मुंबई (पंजी.), संस्थापक-संरक्षक-तानराज संगीत विद्यापीठ (नोएडा) एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी.एन. क्लब (मुम्बई) सहित अन्य संस्थाओं से बतौर पदाधिकारी जुड़े हैं, साथ ही पत्रकारिता का वर्षों का अनुभव है। आपकी लेखन विधा-गीत, कविता, कहानी, लघु कथा व लेख है। बहुत-सी रचनाएँ पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हैं, साथ ही रचनाएँ ४ साझा संग्रह में हैं। ‘स्वर संग्राम’ (५१ कविताएँ) पुस्तक भी प्रकाशित है। सम्मान-पुरस्कार में आपको महात्मा बुद्ध सम्मान-२०२३, शब्द श्री सम्मान-२०२३, पर्यावरण रक्षक सम्मान-२०२३, श्रेष्ठ कवि सम्मान-२०२३ सहित अन्य मिले हैं तो विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कई बार उपस्थिति, देश के नामचीन स्मृति शेष कवियों (मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र आदि) के जन्म स्थान जाकर उनकी पांडुलिपि अंश प्राप्त करना है। श्री सिंह की लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का उत्थान, राष्ट्रीय विचारों को जगाना, हिन्दी भाषा, राष्ट्र भाषा के साथ वास्तविक राजभाषा का दर्जा पाए, गरीबों की वेदना, संवेदना और अन्याय व भ्रष्टाचार पर प्रहार करना है। मुंशी प्रेमचंद, अटल बिहारी वाजपेयी, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, किशन चंदर और पं. दीनदयाल उपाध्याय को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाले ‘चंदन’ के लिए प्रेरणापुंज-पूज्य पिता जी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, महात्मा गॉंधी, भगत सिंह, लोकनायक जय प्रकाश, बाला साहेब ठाकरे और डॉ. हेडगेवार हैं। आपकी विशेषज्ञता-साहित्य (काव्य), मंच संचालन और वक्ता की है। जीवन लक्ष्य-ईमानदारी, राष्ट्र भक्ति, अन्याय पर हर स्तर से प्रहार है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“अपने ही देश में पराई है हिन्दी, अंग्रेजी से अंतिम लड़ाई है हिन्दी, अंग्रेजी ने तलवे दबाई है हिन्दी, मेरे ही दिल की अंगड़ाई है हिन्दी।”