सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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दिखा कर स्वप्न तुम हमको,
प्रिये मत छोड़ जाना
अकेले रह न पाऊँगी,
न तुम हमको भुलाना।
जलाना प्रेम का दीपक,
तुम्हारे हो गए हैं
सजाना ज़िंदगी को तुम,
संगिनी बन गए हैं।
चली आई मैं सबको छोड़,
तेरा प्यार पाने
नहीं जी पाऊँगी तुम बिन,
न करना तुम बहाने।
सभी सुख-दुख सहूँगी साथ,
मैं सम्मान दूँगी।
तुम्हारे साथ जीवन की,
मैं हर सीढ़ी चढ़ूँगी॥