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प्रकृति संरक्षण में मेरा योगदान

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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प्रकृति हमारी माँ के समान है और हमें जीने के लिए बहुत कुछ दिया है। हमें साँस लेने के लिए शुद्ध हवा, पीने के लिए पानी, भोजन के लिए फल और अनाज तथा रहने के लिए भूमि और घर मिले हैं।पेड़-पौधे, नदियाँ, पहाड़, पशु-पक्षी और अनेक प्राकृतिक संसाधन हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। इसलिए, प्रकृति की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
मैंने भी सोचा कि जब प्रकृति माँ ने मेरे लिए इतना कुछ किया है, तो मुझे भी उनकी हिफाज़त के लिए कुछ करना चाहिए। इसलिए छोटा-सा योगदान देने का प्रयास किया है-मैं हर साल ५ पौधे लगाऊँगी। जब तक वे बड़े नहीं हो जाते, मैं उनकी देखभाल करूँगी। मैं उन्हें समय-समय पर पानी दूँगी और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखूँगी। मैं वर्षा के पानी को व्यर्थ नहीं जाने दूँगी और पानी की बचत करूँगी। आवश्यकता न होने पर नल को खुला नहीं छोड़ूँगी।
  मैंने पॉलिथीन का उपयोग भी छोड़ दिया है। अब मैं कपड़े या अन्य पुनः उपयोग किए जा सकने वाले थैलों का ही प्रयोग करती हूँ। घर के कचरे को इधर-उधर नहीं फेंकती। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखती हूँ और उसे उचित स्थान पर देती हूँ। इससे घर और आसपास का वातावरण स्वच्छ रखने में सहायता मिलती है।
  मैं अपने घर की सफाई स्वयं करती हूँ, ताकि गंदगी न फैले। मेरा मानना है कि यदि हर व्यक्ति अपने घर और आसपास की सफाई का ध्यान रखे, तो परिवार स्वच्छ रहेगा, परिवारों से समाज स्वच्छ बनेगा और समाज से पूरा नगर स्वच्छ व सुंदर बन सकता है। इस प्रकार छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।
   मेरे घर में आम, अमरूद, बेल और नीम के पौधे भी लगे हैं। इसके अलावा घर के आसपास फूलों के गमले रखे हैं। इन पौधों की देखभाल करना अच्छा लगता है। पौधे न केवल हमारे घर की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि शुद्ध हवा भी देते हैं।
   नदियों और जलस्रोतों को स्वच्छ रखना भी प्रकृति संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि नदियों को साफ रखेंगे, तो पानी भी स्वच्छ रहेगा। यदि प्रकृति को स्वच्छ और सुरक्षित रखेंगे, तो हमारा पर्यावरण भी स्वस्थ रहेगा।
   समझना होगा कि प्रकृति ने हमें जीवन दिया है, इसलिए उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। मेरा छोटा-सा प्रयास यदि दूसरों को भी प्रेरणा दे, तो यही मेरे लिए प्रकृति के प्रति सच्चा योगदान होगा।
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