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भाषाओं का संवाद केवल शब्दों का नहीं, संस्कृतियों का भी-संतोष श्रीवास्तव

भोपाल(मप्र)।

अनुवाद, भाषायी संवाद का सबसे सशक्त माध्यम है। श्रेष्ठ रचनाओं का हिंदी से अन्य भाषाओं में अनुवाद किया जाना चाहिए, ताकि भाषा के माध्यम से हमारी संवेदनाएं और संस्कृति उन तक पहुंचे। इसी प्रकार अन्य भाषाओं के संवाद ने हिंदी की साहित्यिक विधाओं को भी प्रभावित किया है। अतः भाषाओं का संवाद केवल शब्दों का नहीं संस्कृतियों का संवाद भी है।
     अंतररष्ट्रीय विश्वमैत्री मंच द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर १६ सितंबर को आभासी माध्यम से ‘हिंदी भाषा की समृद्धि के लिए अन्य भाषाओं से संवाद’ विषय पर आयोजित विमर्श में यह बात मंच की संस्थापक अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने कही। इस अवसर पर आपने सर्वप्रथम अहिन्दी भाषी-हिंदी सेवी सम्मानों की घोषणा की। देवी नागरानी (सिंधी भाषी), पद्मा मोटवानी (सिंधी भाषी) एवं डॉ.वसुधा सहस्त्रबुद्धे (मराठी भाषी) को हिंदी भाषा के प्रति उल्लेखनीय योगदान हेतु यह दिए जाने पर हार्दिक बधाई दी।
अपना सम्मान प्रदर्शित करते हुए देव नागरानी ने अपनी अनुभूतियाँ साझा कीं और मंच का आभार व्यक्त किया।
        पद्मा मोटवानी ने कहा कि छठवीं कक्षा में आने के बाद से ही मेरा हिंदी से विशेष प्रेम है। हम भारत वासियों को जिस भाषा ने अभी तक जोड़ कर रखा, वह केवल हिंदी ही है। हिंदी हमारे संवादों का सशक्त हस्ताक्षर है।
डॉ. सहस्त्रबुद्धे ने भी हर्ष व्यक्त करते हुए कहा, कि संवाद की मूल धारणा वाद नहीं, बल्कि सुसंवाद है। भाषा केवल संवाद नहीं हमारे विचार, हमारी संवेदन शीलता का भी माध्यम है। हिंदी हमारी एक प्रकार से सेतु भाषा है।
  प्रमुख वक्ता के रूप में मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीक़ी ने कहा, कि हिंदी भाषा का विदेशी भाषाओं से कभी गहरा व आत्मीय तो कभी प्रशासनिक सम्बन्ध रहा है। हिंदी भाषा की समृद्धि के लिए अन्य भाषाओं से संवाद अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह भाषा को गतिशील, आधुनिक और व्यापक बनाता है। दूसरी ओर यह भी आवश्यक है कि हम अन्य भाषा के शब्दों का प्रयोग तो करें, लेकिन कुछ सावधानियां भी रखें।
वरिष्ठ लेखिका जया केतकी शर्मा ने आग्रह किया कि सभी क्षेत्रीय भाषा, भाषी हिंदी को पढ़ें, बोलें और समझें, क्योंकि यही एकमात्र हमारी सम्पर्क की भाषा है। हमें किसी भी भाषा का बहिष्कार नहीं करना है, बस हिंदी को अपनाना है।
   कार्यक्रम का प्रारम्भ साधना वैद के स्वागत वक्तव्य से हुआ। सुमधुर संचालन आरती शर्मा ने किया। आभार मुज़फ़्फ़र सिद्दीक़ी ने व्यक्त किया।