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मानवीय संवेदना को जगाता है साहित्य-पंकज बिष्ट

व्याख्यानमाला..

दिल्ली। 

यह साफ़ नज़र आ रहा है कि विज्ञान, टेक्नोलॉजी और मशीनीकरण का अंधाधुंध विकास शोषण और दमन के शिकंजे को मजबूत करता जा रहा है। ऐसे समय में मानवीय संवेदना और उसके विवेक को जगाने का काम साहित्य से ही हो सकता है, जिसे पहचानने की बड़ी जरूरत है।
   सुप्रसिद्ध साहित्यकार पंकज बिष्ट ने हिन्दू कालेज में हिंदी साहित्य सभा के उद्घाटन और दीपक सिन्हा स्मृति व्याख्यानमाला में ‘विचारहीनता के दौर में साहित्य’ विषय पर अपने व्याख्यान में यह बात कही। श्री बिष्ट ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब भी दिए। हिंदी विभाग के विभाग प्रभारी प्रो. पल्लव ने हिंदी विभाग के दिवंगत आचार्य दीपक सिन्हा के बारे में कहा कि सिन्हा गंभीर और विचारशील शिक्षक के रूप में जाने जाते थे। प्रो. पल्लव ने सभा के पदाधिकारियों का परिचय भी करवाया। आयोजन में सभी पदाधिकारियों का परिचय करवाया गया।  
     व्याख्यान के बाद श्री बिष्ट ने हिंदी विभाग की भित्ति पत्रिका ‘लहर’ के नए अंक का लोकार्पण भी किया।  ‘लहर’ के सम्पादक मंडल के वरिष्ठ सदस्य सचिन भाटी, आयुष पाण्डेय और शिखा पाण्डेय आदि विद्यार्थियों ने लोकार्पण में भाग लिया। अतिथि परिचय अनुराग ने दिया। वरिष्ठ आचार्य प्रो. रचना सिंह एवं प्रो. बिमलेंदु तीर्थंकर ने श्री बिष्ट का शॉल व पौधा देकर अभिनन्दन किया। दीप प्रज्ज्वलन की रस्म डॉ. नीलम सिंह और डॉ. रुपाली सिन्हा ने निभाई।
  संचालन सौरभ पाल और गोदावरी ने किया। सभा के अध्यक्ष विनीत खुराना ने धन्यवाद ज्ञापित किया।