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सब मिलकर करें प्रयास

पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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जन मन का भाव हिन्दी (हिन्दी दिवस विशेष)…

१४ सितंबर ‘हिंदी दिवस’
हम सब मिल कर धूमधाम से मनायेंगें,
लंबी-लंबी गोष्ठियाँ और भाषण बाजी करेंगें
लेकिन बच्चों को हम पढ़ायेंगें,
बड़े-बड़े अँग्रेजी स्कूलों में
क्योंकि हिंदी बोलने में हम शरमाते हैं
क्योंकि अँग्रेजी बोलना अब स्टेटस सिंबल बन चुका है।

वैसे, तो अँग्रेजी बोलने में हम अक्सर घबराते हैं,
इम्तेहान में बच्चों के नम्बर भी कम आते हैं
लेकिन उनको अँग्रेजी सिखाने में जी जान लगा देते हैं,
क्योंकि हिंदी बोलने में हमारा स्टेटस नहीं दिखता।

एक समय था, जब हिंदी का बोलबाला था
अम्मा की प्यारी-सी पुकार में सुबह का उजाला था
उस अम्मा को अब हम ‘मॉम’ बुला कर खुश होते हैं,
क्योंकि ‘अम्मा’ कहने में हमें शर्म आती है।

देश तो आगे बढ़ रहा है लेकिन हिंदी पीछे हो रही है,
इस हिंदी से आज हम नजर चुराते हैं
हम सोचते हैं, कि अँग्रेजी पूरी दुनिया को चलाती है,
लेकिन हिंदी तो हमारी पहचान
दुनिया से कराती है।

हिंदी में हैं शब्दों का भंडार,
गद्य हो, पद्य हो, लेखन-भाषण
बोलचाल की कोई भी भाषा हो,
हिंदी ही है उसका आधार।

आज भी जहाँ-जहाँ है भारतवंशी,
वह हिंदी बोल कर इठलाता है
आओ हम सब मिलकर करें प्रयास।
हिंदी भाषा को उसका सम्मान दिलायें,
और हिंदी शीघ्र राष्ट्र भाषा बने॥